'जश्न-ए-रेख़्ता' के यूट्यूब चैनल पर हाल ही में जारी हुआ, कबीर के व्यक्तित्व, जीवन-दर्शन और कविता पर एकाग्र मशहूर आलोचक एवं लेखक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल {Purushottam Agrawal} का व्याख्यान बहुत प्रभावशाली, मार्मिक एवं मूल्यवान् है। इसलिए कि इसमें प्रचलित किंवदन्तियों से अलग हटकर वास्तविक इतिहास की रौशनी में, कबीर की कविता के गहन विश्लेषण के ज़रिए उनके जीवन पर विचार करते हुए सर्वथा नई अन्तर्दृष्टियाँ उपलब्ध कराई गई हैं; जिनसे गुज़रकर हमें सुखद अचरज होता है। कुछ प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं : कबीर का जन्म सन् 1398 में हुआ, इस पर विद्वानों में एक तरह की सर्वानुमति रही है; मगर उनका देहावसान कुछ के मुताबिक़ 1448, कुछ के अनुसार 1468, किन्तु बहुत सारी बहसों और शोध के आधार पर ज़्यादातर अध्येताओं की राय है कि 1518 में हुआ। इस हिसाब से वह तीन सदियों के गवाह रहे और कुल 120 वर्ष जिए। प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल कहते हैं कि 'यह बात थोड़ी अटपटी लगती है, लेकिन एक अपवाद के तौर पर तो ऐसा हो ही सकता है।' दूसरे, कबीर औपचारिक रूप से पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे, इसके समर्थन में यह पंक्ति अक्सर उद्धृत की ...
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