हाल ही में श्री गणेशोत्सव समाप्त हुए, पवित्र त्यौहार था पर जाते जाते गणेश जी कह गए कि -"मैं तो ध्वनि प्रदूषण से बहुत घबरा गया पर आने वाले दिनों में माँ दुर्गा को तकलीफ न हो ऐसा प्रबंध करना, डीजे की वजह से आपके मप्र में एक बिटिया की मृत्यु हो गई, यह कितना दुखद है" कुछ बातें अभी ख्याल में आई तो विचार के लिए लिख रहा हूँ, उद्देश्य यह है कि हम ठंडे दिमाग से विचार करें कि इस व्यस्ततम जिंदगी में त्योहार और उत्सव इसलिए मनाते है कि हम सभी तनाव छोड़कर थोड़े समय के लिए खुश हो सकें, सबसे मिल सकें और जीवन जीने के लिए ऊर्जा प्राप्त कर सकें परंतु हो क्या रहा है, इस प्रदूषण में सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि साल भर के वो सब इवेंट्स भी शामिल हैं जिनसे हम मानसिक संतुलन खोते जा रहे है कोतवाली में फोन करो तो कहते है - "भगवान का भजन सुन लो साहब, थोड़े दिन की बात है" और फिर वे आयोजन समिति को बता देते है या मंदिर प्रबंधन को कि फलाने ने शिकायत की है आपकी, जबकि यह जानकारी गुप्त रखने का प्रावधान है, इसके बाद उसी पुलिस के जवान के साथ सारे भक्तजन आपके घर आ जाते है धमकाने और मां - बहन करने और आपको ठीक ...
The World I See Everyday & What I Think About It...