मुन्ना बहुत खुश था अब वो बड़ी दूकान पर जा रहा है पर अपनी योग्यताओं को लेकर सशंकित था पर इतना तो पक्का था कि वो नौकरी के लिए कुछ भी कर सकता था और उसने किया भी जी हूजूरी, चाटुकारिता, गुलामी, और रिश्वत जैसे भी हथियार अपनाए हाँ इसमें कुछ पाने लोगो से जरूर पंगा हो गया पर साला दूकान पर जाने के लिए ये सब तो लाजमी है सो काहे का डर और काहे का संकोच बस लग गया मुन्ना (एनजीओ पुराण भाग ६१)
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