उसे लगता था कि देश में अब क्रांति आ ही जायेगी बस दो कदम दूर है और सारे सर्वहारा के लिए तरक्की के द्वार खुल जायेंगे, इसी जोश में वो ख्वाब बुनने लगा था कि देश में दूध दही की नदिया फिर से बहेंगी फिर क्या था वो दुगुने जोश से बाहर जाता, नया था ना, दूकान के मालिक ने कहा अबे तुझे नौकरी पर रखा है और सब कुछ ठीक हो गया तो मेरी दूकान कैसे चलेगी चुपचाप काम कर या फूट ले यहाँ से, तब से वो सिर्फ दूकान में काम करता है और कुछ नहीं(एनजीओ पुराण भाग ४४ समाप्त)
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