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एनजीओ पुराण भाग ५१

बहुत हैरान परेशान था, काम की समझ तो थी नहीं और राजनीति से कोइ वास्ता नहीं था सो कुल मिलाकर उपरी माला खाली था बस शराब ही साली ऐसी चीज थी जो जिंदगी चलाने लायक अक्ल दे देती थी अब क्या करे किसी ने कहा एम्एसडब्ल्यू कर लो कुछ नहीं तो नौकरी तो मिल ही जायेगी बस फिर क्या था बन्दा प्रदेश के एकमात्र कालेज में घुस गया जुगाड से आजकल मजे में है और संसार चला रहा है सूना है दूकान भी खोल ली है और अनुदान मांगता है(एनजीओ पुराण भाग ५१ समाप्त )

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