वो इसी कसबे का रहें वाला था फिर संस्था में लग गया, बाद में पढ़ पढ़ा कर एक शोध की डिग्री भी ले ली और स्थानीय कालेज में लेक्चरार हो गया, बस मेधावी था बड़ा होनहार था सो किस्मत चल निकली कविता कहानी वगैरह करना तो शगल था ही आजकल सब करता है संस्था और कालेज, बस करता तो काम नहीं, बाकि सारे कसबे की हर गतिविधि में शामिल रहता है कहते है वो शहर के सबसे बड़ा बुद्धिजीवी है(इति एनजीओ पुराण भाग २७ समाप्त)
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