वो देश का जाना माना कप्यूटर का दिमाग था उसे लगा कि शिक्षा में काम की जरूरत है सो उसने अपने ही नाम से एक बड़ी दूकान डाली, और अपने ही कंपनी का काफी रूपया लगा दिया फिर देश भर से बुद्धीजीवियो को इकठ्ठा किया और झकास तरीके से शिक्षा का काम शुरू किया कुछ रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारियो को, और उनके बच्चो को उसने रोजगार दिया इस तरह से वो देश का कर्मवीर बना और अब उसकी नजर पदमश्री पर है (इति एनजीओ पुराण भाग २२ समाप्त)
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