इतनी खूबसूरत थी कि लगता था स्वर्ग से आई है यहाँ पिछड़े प्रदेश में आकर जम गयी, पुश्तैनी रूप से दूकान मिल गयी थी, बड़े शाहर की अंग्रेजीदा थी सो सब सम्हाल लिया बस सास के मृत्यु के बाद पूरा कब्जा हो गया था दूकान पर फिर क्या था खूब काम किया और खूब जमीन जायदाद खरीदी बेटे के एड्मिशन में भी लाखो का चन्दा दिया आखिर डाक्टर बने बिना विरासत कौन सम्हालेगा. दूकान पर परियोजनाए जारी है और खूबसूरती का मेंटेनेंस भीा(एनजीओ पुराण भाग ४९ समाप्त )
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