Apurva Bharadwaj ने याद दिलाया कि यहां हम सब अपने बच्चों के प्रतिशत को लेकर उचक कर उनकी प्रतिभा दर्शा रहें है , खुद क्रेडिट ले रहे है, बधाईयां ले दे रहें है मुफ्त में और उधर निकम्मे, अनपढ़ और गधों को अपना और अपने देश का भविष्य सौंप रहें है और गधों ने देश की वाट लगा रखी है जाहिल गंवार मन मर्जी से नोट बन्द कर टैक्स थोपकर अंधविश्वासों से 138 करोड़ लोगों को मजे से बेवकूफ बनाकर अपने लोगों को रेवड़ी बांटकर स्वयम्भू महान बन रहे हैं ये ही 100 % से लेकर 80% वाले आपके बच्चों को बेरोजगार बनाकर छोड़ेंगे और एक दिन वे जुलूस में या तो मारे जाएंगे इन कमीनों की राजनीति में या कुंठा ग्रस्त होकर आत्महत्या कर लेंगे या किसी अरब देश मे मजदूरी करेंगे या कनाडा अमेरिका जाकर बटन पुशर बन जाएंगे टेक्नो मजदूर और आप घर मे अकेले मरने के लिए अभिशप्त हो जाएंगे और मुखाग्नि भी नगर निगम का आदमी देगा - सोच लेना एक बार एक बार देश के प्रमुख से लेकर अपने उम्मीदवारों की मार्कशीट, डिग्री देख लें फिर यहाँ बच्चों के बैंड बाजे बजाना [ कड़ी भाषा के लिए मुआफी पर इसके बिना समझ भी नही आएगा ] *** दुर्योधन वह भी ...
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