नाज़िम हिकमत की लम्बी कविता तुर्की कवि नाज़िम हिकमत का जन्म 1902 में सलोनिका, ओट्टोमान साम्राज्य ( वर्तमान में ग्रीस का एक राज्य ) में हुआ. घर में रचनात्मक माहौल होने के कारण उन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा. कवि होने के साथ-साथ वे नाटककार और उपन्यासकार भी थे. उच्च शिक्षा के लिए नाज़िम मॉस्को गए, जहाँ रहते हुए वे दुनिया भर के कई लेखकों, कवियों और कलाकारों के संपर्क में आए. 1928 में रूस से तुर्की वापस आकर एक प्रूफरीडर, पत्रकार और अनुवादक के बतौर काम करते हुए नाज़िम के कई कविता संग्रह प्रकाशित हुए. अपनी वामपंथी विचारधारा और क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण जीवन का एक लम्बा अरसा उन्हें जेल में ही बिताना पड़ा. 1951 में हमेशा के लिए तुर्की छोड़ कर वे तत्कालीन सोवियत संघ चले गए, कुछ समय के लिए यूरोप भी रहे और अंत तक अपनी विचारधारा के लिए काम करते रहे. 1963 में ह्रदयाघात के कारण मॉस्को में ही उनका निधन हुआ.
प्रस्तुत है, अपने जेल के दिनों में उनके द्वारा लिखी गयी एक लम्बी कविता :
जब से मुझे इस गड्ढे में फेंका गया
नाज़िम हिक़मत
जब से मुझे इस ग...
The World I See Everyday & What I Think About It...