Sunday, January 6, 2019

Archana Verma and World Book Fair 2019 Posts of 4 Jan 2019

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दुर्भाग्य यह कि ये वो ही अर्चना वर्मा है जिन्हें राजेन्द्र यादव ने छापा और मंच दिया हंस का
60 के बाद अक्ल का कोई भरोसा नही, व्यक्तिगत कोई दुश्मनी नही पर इससे इनके चेले चपाटे और मूर्खताएं करते है , इनके जैसे लोग विवि के हिंदी विभागों में जोंक की तरह से चिपके बैठे रहते है, इनके फोन से पीएचडी फाइनल होती है और नियुक्तियां भी
ये एक नमूना है 60 के बाद का जहां उम्र का असर दक्षिण पंथी होने का, पाप पुण्य और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का सुसंगठित प्रयास होता है, आश्चर्य यह है कि अर्चना जी को 1986 से हंस से लेकर जगह जगह पढ़ता रहा पर अब अफसोस होता है कि कितना समय जाया किया , जब किले ध्वस्त होते है तो इनकी अभेद समझ सामने आती होती है तो तकलीफ़ होती है
अब लगता है कि हंस में इनकी समकालीन रही स्व डॉक्टर प्रभा खेतान की समझ कितनी साफ और विलक्षण थी , तभी वो सिमोन द बाउवा का The Second Sex [ स्त्री उपेक्षिता ] का कालजयी अनुवाद कर पाई और ये एक आलोचक बनकर रह गई सिर्फ और आज विशुद्ध ....
सम्मान अपनी जगह पर मतभेद अपनी जगह, हो सकता है मन में किसी अकादमी का पद पाने से लेकर ज्ञानपीठ पाने की हसरत बाकी राह गई हो जो मिरांडा हाउस में रहकर पूरी ना हुई हो
ख़ैर, कहा ना कौन कब मतिभ्रष्ट हो जाएगा कहा नही जा सकता और ये तो एक है अभी कई लोग इस तरह की टिप्पणियां लिखकर यहां पोस्ट कर रहें है, वे ये भूल रही है कि सोनिया गांधी भी एक स्त्री है, माँ है और आपसे ज़्यादा देश भक्त है आप लोग जो हिंदी विभागों में घटिया राजनीति करके लाख कमा रहे है और देश भर के विवि में घूमकर पारिश्रमिक बटोर रहीं है ना उन्हें यह समझ नही कि निर्मला , मोदी और जेटली ने किस निम्न स्तर से भाषा का अमर्यादित प्रयोग ऑन रिकॉर्ड किया, सुमित्रा महाजन जैसी महिला ने पक्षपात किया और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को संसद में अपमानित किया मानवीय गरिमा के प्रतिकूल होकर
अर्चना जी, जो बिम्ब आपने आखिर में इस्तेमाल किया है वही मैं भी कर रहा हूँ कि सारी उम्र आप जो महिला लेखन, आलोचना और गद्य लेखन करती रही ना वह भी रामायण की भांति ही था और जब समाहार के रूप में आपको पूछा गया तो आपका जवाब है कि सीता ने राम को राखी इसलिए बांधी कि कैकेयी दशरथ की माँ थी
अभी आपको, आपके भक्तों को यह पढ़कर देखिएगा कैसी मिर्ची लगेगी और वे विष वमन करेंगे , मुआफ़ कीजिये आपमें और उमा भारती या बारहवीं पास स्मृति ईरानी में कोई फर्क नही - रत्ती भर भी नही, बल्कि वो कम से कम खुलकर लूटेरों की टोली में शामिल है और आप छुप छुपाकर समझ खोखला कर रही हैं , आप लिस्ट से मुझे सबसे पहले ब्लॉक करेंगी यह तय है पर हिंदी की और विदुषिया अपनी कमजोर दृष्टि से घृणित टिप्पणियां कर रही है जो देश भर में पीएचडी के पोथे जांचने के बहाने पर्यटन कर मौज उड़ाती रहती है
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◆◆ जाहिर सूचना ◆◆
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मीडिया के नाम पर अपने जमीर को बेचने वाले पोंगा पंथी एंकर, मीडिया पढ़ाने वाले उजबक गंवार युवा जो रोज फेसबुक पर रायता फैलाकर स्वयम्भू मीडिया शिक्षक बनें है, चुपके चुपके सब पढ़ जाने वाले और फिर फेसबुक को घटिया माध्यम बताने वाले चुतियाओं से मिलने मिलाने के ठेके भी हम लेते है 
★★★

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