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महाराष्ट्र समाज महू मप्र ची आठवण 3 Jan 2019


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आपके पास स्मृतियाँ और अतीत है तो आप संसार के सबके अमीर व्यक्ति है
◆◆●

मला महाराष्ट्र समाज महू चा हॉल आठवला
महू म्हणटळं कि आजोल, माझा जन्म स्थान, माझ गोत्र आणि लहान पणाच्या सर्व गोड आठवणी तिथं नोंदल्या गेल्या आणि किती तरी कौतुक असायच, दिवाली , दसरा, काका - आत्यांचे लग्न, तेन्चे बालनपन आणि बाकी सर्व आनंदा च्या गोष्ठी
अगदी स्टेशन जवळ महाराष्ट्र समाज आणि तेचा पुढच्या कोपर्यावर आमच लूनियापुरा वाल घर, आजी लग्न करुंन तिथेच आली होती, अण्णा सुद्धा ग्वालेहर स्टेट च मोठ घर आणि सर्व गौत्र सोडून येथे मालवा मध्ये आले, लग्न झाल, माझे वडील आणि 7 काका आणि आत्यांचे जन्म या घरात झाले जवळ जवळ आम्ही त्या घरात 60 वर्ष राहिलो - एक खोली खाली आणि एक वर देखील छोटस सयपाक घर आणि कच्चा संडास
आम्ही सर्वजन जमल्यावर घर कधीच लहान पड़ल नाही पण आज इतके मोठे घर आहे पण मनात जागा नाही तर काय करूँ शकतो है यक्ष प्रश्न आम्ही सर्व मराठी लोकांना समोर आहै, त्यातून ही जि लोक मुंबई पुण्या ला गेलें ते तर आणिक च "व्यवस्थित झाले" है म्हणायचे आहे
माझी आजी तिथं दर गुरुवारी जायची, कधी कधी श्रीसूक्त चे कीर्तन सुद्धा व्हायचे
हॉल अगदी असाच आहे, इकडे बऱ्याच दिवसा पासून गेलो नाही तर ठोक नाही पण आज हे चित्र बघून अक्षरशः डोळ्यात अश्रु आले आज, या तीन आजी, ते चश्मे, ति खुर्ची आणि डोळ्यात देवा करिता पूर्ण समर्पण आणिक किती तरी आम्ही सांस्कृतिक झालो पण है भाव कुठून आणनार , नवीन पीढ़ी हे कधीच समझू शकणार नाही
चित्र सौजन्य श्रीयुत Ahlad Ganpati Kane चा आहे त्यांचे अनेक अनेक अभिनंदन आणि धन्यवाद

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