Skip to main content

Post of 31 May 2020

किसी साहित्यकार से दोस्ती होना जरूरी है क्या और इसके भी भेद है - कहानीकार, कवि, उपन्यासकार और आलोचक - सबसे ज़्यादा बेहतर कौन हो सकता है एक दोस्त के तौर पर
बहुत सालों से इन्हीं इन्हीं को देखकर उकता गया हूँ साथ ही कुछ और लोगों से भी लगता है कुछ नया सकारात्मक सोचना और करना है तो इनसे निजात पाये बिना संभव नही - ये तो वैसे भी सुलभ है कही ना कही दिख ही जायेंगे चमकते और निंदा पुराण में व्यस्त
कुछ हस्तियों और चमकदार सितारों को दो तीन साल पहले बाहर किया था तो सुकून मिला था - अपुन वैसे भी विशुद्ध लठैत है - प्रेम मुहब्बत के चक्कर मे है नही, ना ही किसी से रोटी बेटी का सम्बंध निभाना है ना किसी से फायदा लिया और ना लेना है
मजदूरी करता हूँ और अपना खाता हूं, किसी से दो कौड़ी का चरित्र प्रमाणपत्र लेना नही या भला बुरा होने का थेगला लगवाना है और जिससे भिड़ना होता है - सीधी बात करता हूँ , अभिदा, लक्षणा, व्यंजना में बात अपने बस में नही, आलोक बाबू सीखा देते तो हिंदी के चार ठों पीजीटी या कवियों को ही निपटा देता, अभी एक ही निपटा है बाबा महाँकाल की कृपा से - कच्चे कान का भी नही कि यहाँ - वहाँ की बकलोली सुनकर किसी की रौ में आकर पेलने लगे - गवई हूँ ठेठ
खैर, सुझाव आमंत्रित है फिर कुछ को निपटाएंगे - ससुर बहुत गर्दा मचाये है , फेसबुक से हटाना तो बेहद आसान है और निपटाकर निपटाओ तो मृतक को भी नही लगता कि वेंटिलेटर का खर्च नही लगा और जीवन समाप्त हो गया
🤣 🤣🤣
यह भी पचती नही बहुतों को इन दिनों
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...