Skip to main content

Posts of 6 Dec 15


हम अपने कालातीत पंखों से 
एक व्योम में झाँक रहे है खाली से
और समय हमारी गिरफ्त से बाहर है
यह समय को विदाई देने की बेला है
और निस्तेज होती देह को विराम.


**********************
डा आंबेडकर सिर्फ संविधान तक ही सीमित रहते तो शायद आज उनका देश में कुछ और स्थान रहता। दूसरा संविधान सभा के बाकी सदस्यों के गुजर जाने के बाद वे शायद अकेले ही बचे थे जिन्होंने इस ग्रन्थ की रचना की, इसलिए उन्हें सिर्फ संविधान तक ही सीमित रहना था। बहरहाल आज के विवादास्पद दिवस पर आंबेडकर को याद करना खानापूर्ति ना होकर सच्चे अर्थों में हम सहिष्णु लोकतांत्रिक बन पाएं तो अपने आपके ऊपर ही एहसान होगा बाकी सब तो जाए भाड़ में।

***************
ग्वालियर साईंस सेंटर के संस्थापक श्री अरुण भार्गव का ब्लड कैंसर की वजह से 5 दिसंबर को मात्र 67 वर्ष की उम्र में भोपाल में निधन हो गया।वे दो माह से गम्भीर बीमार थे और दिल्ली में भर्ती थे। तीन दिन पहले ही उन्हें भोपाल के बंसल अस्पताल में एम्बुलेंस से लाया गया था वेंटीलेटर पर। मेरी अभिन्न मित्र और संस्थान की अध्यक्ष सुश्री संध्या वर्मा ने अभी इस दुखद खबर के बारे में बताया। अरुण भार्गव से मेरा सन् 87 का परिचय था। मेपकॉस्ट के निर्माण में भी उनकी महती भूमिका थी। अरुण जी ने मप्र में विज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए बहुत काम किया और बाल विज्ञान कांग्रेस को आम लोगों और बच्चों तक पहुंचाया। आख़िरी समय में वे बीमारी और परिवार से परेशान रहे, पर फिर भी वे लड़ते रहे सारे दुःखो के बावजूद। मेरी उनसे आख़िरी मुलाक़ात किशोरियों के स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान देवास में हुई थी। इधर बहुत दिनों से मिलना तय था, पर दुर्योग कुछ ऐसे बने कि मैं ना मिल पाया। वे विज्ञान शिक्षा को लेकर साथ में कुछ करना चाहते थे और हमने बहुत सारी योजनाएं बनाई थी साथ काम करने की। प्रदेश में काम कर रही संस्थाओं से उनकी पटरी कभी बैठी नही, ग्वालियर से भोपाल आये थे तो उन्हें स्थापित होने में समय लगा फिर संध्या जैसे मित्रों ने उन्हें साथ दिया। इधर तीन चार वर्षों से उन्होंने संस्था की जिम्मेदारी सन्ध्या को सौंप दी थी और वे चिंतन मनन में व्यस्त रहते थे। यात्राएं कम कर दी थी पर इसके पहले उन्होंने देश के सुदूरवर्ती स्थानों पर बाल विज्ञान कांग्रेस के माध्यम से विज्ञान जैसे जटिल विषय को लोकप्रिय बनाया। शिक्षकों , युवाओ और बच्चों को साथ जोड़कर एक नया इतिहास रचा। NCSTC में डा नरेंद्र सहगल, मधु फुल्ल की टीम के साथ जनविज्ञान का महत्वपूर्ण कार्य किया।
यह दुखद संयोग ही है कि ख्यात वैज्ञानिक और शिक्षाविद् डा विनोद रायना की मृत्यु भी कैंसर से हुई थी और अरुण जी की भी। दोनों सुलझे हुए लोग थे हालांकि मत भिन्न थे दोनों के परन्तु दोनों के अवदान को आंकना मुश्किल होगा। मप्र ने विनोद भाई, डा अजय खरे, वसन्त शेंडे के बाद एक महत्वपूर्ण जन विज्ञानी खोया है जो प्रदेश के लिए बड़ा नुकसान है। एक बड़े आंदोलन से जुड़े लोगों का इस तरह से जाना निश्चित ही दुखद और पीड़ादायी है। विनोद भाई, अजय खरे, वसंत, या अरुण भार्गव जैसे सांगठनिक क्षमता वाले लोग बिरले ही पैदा होते है। यह मप्र में हम लोगों का सौभाग्य ही है कि हम इनके साथ कन्धे से कन्धा जोड़कर मिले थे, साथ सीखा, काम किया और अपनी समझ साफ़ की और आज जो भी है ऐसे साथियों की वजह से ही है। यह हमारे लिए कोई कम नही कि हमने इनके साथ इतिहास बनाया और लिखा है।
सन्ध्या ने बताया कि 28 की रात को दिल्ली से फोन करके उन्होंने कहा था कि साईंस सेंटर का काम आगे बढ़ाना और विज्ञान के लोकप्रियकरण का काम अधूरा नही रहना चाहिए। अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम प्रदेश में इस काम को आगे बढ़ाते रहे।
अरुण जी को श्रद्धांजलि और नमन।

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

अदम गोंडवी की ग़ज़लें

अदम गोंडवी की ग़ज़लें............हिन्दुस्तान ने एक शायर ही नहीं खोया बल्कि एक मुकम्मिल इंसान खो दिया है जो लोगो से लोगो की बात कराता था.............और बस इसी तरह से लड़ते भिडते और मौत से भी जीत गया वो........किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई और किसी का मोहताज भी नहीं रहा धन्य है ऐसे अदम गोंडवी और धन्य है उनकी धारदार लेखनी.........नमन......... काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास मे उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 000 मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की? इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया सेक्स की रंगीनियाँ या ...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...