Skip to main content

Posts of 3 Dec 15


जो दुनिया की सरकारें आज तक भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं दिला पाई, जो मप्र की दिग्विजय या शिवराज सरकार यूनियन कार्बाईड का कचरा जलाने का निर्णय नही ले पाई, जो सुप्रीम कोर्ट पीड़ितों के मुआवजे का हिसाब नहीं करवा पाई और इस सबमे शामिल लोग कितने घिघौने है, मक्कार और भ्रष्ट है - यह कल्पना से परे है. दूसरा तथाकथित मानवता और जल्लाद के बेशर्म के प्रतिनिधि पेरिस में दुनिया भर से इकठ्ठा होकर जलवायु पर बात कर रहे है.......
धिक्कार है ऐसी व्यवस्था और मानवता के दिखावे पर........थू है इन दुनियाभर के लोगों पर जो 26/11 , या चेरनोबिल या भोपाल गैस त्रासदी के नाम पर साल दर साल जश्न मनाते है और भोपाल में गैस पीड़ितों के नाम पर दूकान चलाने वाले एनजीओ और इनका प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं और बुद्धिजीवियों को भी हजार लानतें भेजता हूँ.......

3 दिसंबर को भोपाल में स्थानीय अवकाश घोषित कर दिग्विजय सिंह सरकार ने छुट्टी पा ली थी और आज तक लोग सिर्फ छुट्टी हे मना रहे है.........शिवराज जी सबका सामूहिक श्राद्ध कर दीजिये अब तो ......
उन सभी को नमन जो अकारण ही विज्ञान के विकास की चपेट में आ गए.

अरविन्द और प्रशांत भूषण , योगेन्द्र और आशीष खेतान मिलकर पूरे देश को उल्लू बना रहे है.........ये लोकपाल पर बहस और फ़ालतू रेडियो का प्रचार प्रसार मोदी जी के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है.







Twitter पर साहेब का कोई ट्वीट आया क्या, साहब का कोई नुमाईन्दा चेन्नई गया क्या, या साहब को पेरिस से फुर्सत मिली क्या, कोई मदद की घोषणा हुई क्या, राहुल गांधी गए क्या, राजनाथ जी ने कुछ कहा क्या, संघ के कार्यकर्ताओं ने मदद शुरू कर दी होगी ना, विदेशों से कोई राहत पहुँची क्या चेन्नई.........वामपंथियों ने कुछ कहा क्या, संविधान क्या कहता है ऐसे में "कल्याणकारी राज्य की भूमिका" की क्या होनी चाहिए , बहस तो सबने बहुत कर ली थी और ज्ञान बाँट दिया था साहब से लेकर कम्युनिस्टों ने पर असली क्रियान्वयन क्या हो रहा है देश की जनता और एक राज्य मुसीबत में है, ???
जी हाँ - अगर गाय, भैंस, कुत्तें, सूअर, गधे-घोड़े, आमिर खान, सहिष्णुता, रक्षा मंत्री के बयान, शनि मंदिर में महिला के तेल चढाने से, और हमारे मीडियाकर्मी उर्फ़ गिरगिटों को सेल्फी से फुर्सत मिल गयी होगी तो थोड़ी बात चेन्नई की कर मितरों................
फ्रांस में तो सबने रंग रंग दिए थे और आंसूओं की बाढ़ आ गयी थी पर अब फेस बुक पर दिख नहीं रही संवेदना और भावनाएं........क्या हुआ शेयर मार्केट में बिजी है क्या दोस्तों.?

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

अदम गोंडवी की ग़ज़लें

अदम गोंडवी की ग़ज़लें............हिन्दुस्तान ने एक शायर ही नहीं खोया बल्कि एक मुकम्मिल इंसान खो दिया है जो लोगो से लोगो की बात कराता था.............और बस इसी तरह से लड़ते भिडते और मौत से भी जीत गया वो........किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई और किसी का मोहताज भी नहीं रहा धन्य है ऐसे अदम गोंडवी और धन्य है उनकी धारदार लेखनी.........नमन......... काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास मे उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 000 मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की? इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया सेक्स की रंगीनियाँ या ...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...