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Posts of 12 Dec 15



News Concept 13 Dec 15


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मैं ख़याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है,
सर-ए-आईना मेरा अक्स है, पस-ए-आइना कोई और है

मैं किसी की दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी की हर्फ़-ए-दुआ में हूँ,
मैं नसीब हूँ किसी और का, मुझे माँगता कोई और है


अजब ऐतबार-ओ-बे-ऐतबार के दरम्यान है ज़िंदगी,
मैं क़रीब हूँ किसी और के, मुझे जानता कोई और है

तेरी रोशनी मेरे खद्द-ओ-खाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर,
तू क़रीब आ तुझे देख लूँ, तू वही है या कोई और है

तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी, मुझे दोस्तों का पता नहीं,
तेरी दास्तां कोई और थी, मेरा वाक़या कोई और है

वही मुंसिफ़ों की रवायतें, वहीं फ़ैसलों की इबारतें,
मेरा जुर्म तो कोई और था, पर मेरी सजा कोई और है

कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं, देखना उन्हें ग़ौर से,
जिन्हें रास्ते में ख़बर हुईं,कि ये रास्ता कोई और है

जो मेरी रियाज़त-ए-नीम-शब को "सलीम" सुबह न मिल सकी,
तो फिर इसके माअनी तो ये हुए कि यहाँ ख़ुदा कोई और है.

-सलीम कौसर
सर-ए-आइना=दर्पण के सामने
पास-ए-आइना=दर्पण के पीछे
ऐतबार-ओ-बे-ऐतबार=विश्वास-अविश्वास, मुख़्तलिफ़=भिन्न
मुंसिफ़ों=न्यायाधीशों, रिवायतें=परम्पराएँ, इबारतें=अर्थ
रियाज़त-ए-नीम-शब=आधी रात की प्रार्थना

साभार - Satya Patel
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मोदी जी ये धुँआ काहे का है ?
शिंजो जी, ये गंगा आरती का दृश्य है हम लोग अमृत समान पानी में देश की हर नदी में ऐसी ही आरतियाँ हम करते है और ये ससुरा धुंआ उठ जाता है, क्या जापान में कोई तकनीक है जो इस धुएं को रोक सकें.........?
ओह, तभी बनारस देश के पहले दस प्रदूषित शहरों में है। आय सी !!!!


(Japanese PM Andre Shnjo visite banaras on 12 Dec 15 and attended Ganga Arti in late evening hours)

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मेरे मोहल्ले का किराने वाला जो छोटी सी दुकान चलाता है, पूछ रहा है कि इसका मतलब अब चाइना का माल बन्द करके जापानी लाकर बेचना शुरू कर दूं, भिया ये क्या बनारस से लाने पड़ेंगे थोक में ?

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