Skip to main content

Budget 2022-23 - Post of 1 Feb 2022

 

बजट में ज्यादा दिमाग ना लगाए

फायदे के लिए सुधीर चौधरी और नुकसान के लिए रविश कुमार रखे हुए हैं
***
अभी एक पाँच सौ का नोट पड़ा मिला - उस पर लिखा था सिर्फ यह - "अमृत काल"
नोट पर गांधी बाबा भी नही थे, आगे - पीछे मेले प्याले - प्याले मोई जी की फोटू थी और पीछे लिखा था - "मेरे हर कर्म से समाज के सबसे गरीब ही नही, बल्कि अमीर आदमी का भी कबाड़ा निश्चित है और यही ताबीज़ अगले 25 वर्षों तक सबको पहनाऊँगा"

'मैं धारक को पाँच सौ रुपये देने का वचन अदा करता हूँ ' - टाइप उदघोषणा नही थी रिज़र्व बैंक के गवर्नर की
***
हे कौटिल्य कहाँ हो, हे चाणक्य अवतार लो पुनः इस पावन धरा पर
आओ समझाओ देवताओं - ये अमृत काल
***
10 मार्च के बाद का अमृत काल मुबारक हो मित्रों आप सबको
***
नए शब्द
पेट्रोल मल्लब पेट - लोड
डीज़ल मल्लब दिल - जल
***
अभी आंगनवाड़ी का जो हाल है वही कोई देख लें तो आत्महत्या कर लें - अपग्रेड होने के बाद भगवान जाने क्या होगा, वैसे हमारे मामा के मुंह मे पानी आ गया और महिला बाल विकास विभाग तो नाच रहा है खुशी के
***
इस बाई की पीएचडी किसी ने देखी क्या, या ये भी "एंटायर अर्थ शास्त्र" में पीएचडी है - ये साला अमृत काल क्या होता है
***
इस्मार्ट सीटी
बुलेट ट्रेन
मेट्रो ट्रेन
रोजगार
शौचालय मल्लब संडास
सिकसा
स्वास्थ्य
उधोग
महिला हिंसा
बेटी पटाओ
नक्सलवादी किसान जैसे घटिया मुद्दों के लिए अमृत काल में क्या प्रावधान रखा माताजी ने बजट रूपी मनलुभावने दस्तावेज़ में
और मोई जी के उड़न खटोले, नई गाड़ी, जूते, चश्में, नाई, फोटुग्राफर, मशरूम आटा, वामियों कांग्रेसियों और मुसलमानों के लिए शूटर, सूट, टोपी, दाढ़ी सेटिंग, चिड़िया, कबूतर एवं मोर, एपल के लेपटॉप, विदेश दौरों, टेलीप्रॉम्प्टर, अपनी माँ के साथ फोटू हिंचाने के, पिट्रोल डीज़ल, स्त्री पीछा करने वाले का मानदेय, लोयाकरण और मोब लिंचिंग का क्या प्रावधान है माते
***
कछु बी समझ नई आ रियाँ भोत जल्दी जल्दी बोल री हेगी और समझ नई आ रियाँ कि क्या क्या सस्ता हुआ हेगा - मेंगा तो सब इज हुआ होगा
जे हिंदी क्यों नई बोलती, दस साल में बी नई सीखी क्या और जे भैंजी तो दिल्ली के नेहरू बाले देशद्रोही विवि में पढ़ी हेगी फिर बी, बापड़े भक्तों और सिसु मन्दर से पढ़े लोग्स को बी पल्ले नई पड़ रियाँ और अपने ब्यापारी भाई बैन बी आँखें फाड़कर देख रिये - ज्ञानी लोग समझाएंगे सबकूँ मैंने बोल रखा हेगा और फिर सर्वशक्तिमान एंकर लोग्स बी पिरकाश डालेंगे
सब बोल रिये बढ़िया है, सब टेबल ठोंक रिये है तो बढ़िया इज होगा
बस अपन तो मोई जी को देख रिये है कि कैसे मुस्कुरा रिये हेंगे इसको धड़ धड़ अंग्रेज्जि बोलते देख और टेलीप्रॉम्प्टर बी नई हेगा
***
जितनी लूटपाट और गड़बड़ी डिजिटल लेनदेन और पेमेंट से हुई वह अकल्पनीय है और किसी छोटे सब्जी वाले, छोटे दुकानदार या छोटे वेंडर से पूछ लें कि किस तरह से लोग उसे बेवकूफ बनाकर लूट रहें है नकली एप से या फर्जी स्क्रीन शॉट्स से
***
जितना बोल रही हो उसका 1% भी जमीन पर और हक़ीक़त में हो जाये तो जनता आपकी आभारी रहेगी, आंकड़ों की जुगाली मत कर बाई - ठोस बात कर

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...

सतरें जीवन के - तटस्थ Satare Jivan ke

सतरें जीवन के   जब प्रवाह में बह जाने का समय आता है, लगता है कि अब सब खत्म हो ही रहा है - अचानक एक तिनका कही से तैरते हुए आ जाता है और शिद्दत से थाम लेता है यह कहकर कि धैर्य रखो, शांत हो जाओ - उजाले की किरणें छटा बिखेरेंगी जल्दी ही शाम ओस से भीगी हुई एक कविता है जिसने संसार में अपनी लय से सबको बाँध रखा है जीवन झूठ का पुलिंदा है और हम सब इसे पसंद करते है, हम सब झूठ के साम्राज्य को बनाये रखना चाहते है और इसी उपक्रम में मरने तक मेहनत करते रहते हैं, अंत में मौत का सच इसकी हवा निकाल देता है अयोग्यता ही असली धन और शांति है, जब तक अयोग्य लोग है तब तक योग्यता की असली और वीभत्स सच्चाई सामने आती रहेगी जो स्वाभाविक ना होकर ना - ना प्रकार के कृत्रिम संसाधनों से अर्जित कर सुख सम्पदा हासिल करने के लिए बेहतरीन स्वांग के साथ ओढ़ी गई है हारना और स्वीकारना हिम्मत का काम है और इसकी जड़ें बहुत गहरी होती है, अपूर्णताएँ, अकुशलताएँ और अधकचरी थोथी सूचनाएँ जीवन के उत्तरार्ध में आपको एहसास दिलाती है कि आपके सारे प्रयास, अभ्यास और चेष्टाएँ व्यर्थ है - इसलिये ख़ारिज करो अपने हर कर्म को, समझ को, देख...