Skip to main content

जादुई मैथीदाने के लज़ीज़ व्यंजन - मैथी खिचड़ी 18 Oct 2019

जादुई मैथीदाने के लज़ीज़ व्यंजन - मैथी खिचड़ी


एक कटोरी मैथीदाना लीजिए - इसे रात में पर्याप्त पानी मे गला दीजिए
सुबह पानी निथार कर एक बार फिर से साफ पानी से धो लीजिए इसके बाद एक साफ कपड़े में बांधकर रख दीजिए कोशिश करिए कि बंद डिब्बे में रखें ताकि दिन भर में इसमें अंकुरण हो जाए
अब एक प्याज , 6 लहसन की छिली हुई कलियां, 2 हरी मिर्च , एक टमाटर, 1 इंच अदरख को बारीक काट लें और गर्म कढ़ाई में दो चम्मच सरसों के तेल में राई - जीरे का तड़का देकर इन सब को अच्छे से भून लें
छोटा आधा चम्मच हींग डालेंगे तो स्वाद और बढ़िया हो जाएगा
अंकुरित मेथीदाने को इस मिश्रण में डालकर भून लें और दो कटोरी साफ धुले चावल इसमें मिला दें
1 बड़ा चम्मच देशी घी और कढ़ी पत्ते की कुछ पत्तियां मिलाकर मिश्रण को 5 मिनट तक भून ले
इसके बाद एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर , एक चम्मच धनिया पाउडर , एक चम्मच गरम मसाला मिलाकर पुनः इस मिश्रण को 2 मिनट भून लें
अब इसमें दो ग्लास पानी डालकर मद्धम आंच पर पकने को रख दें, लगभग 15 मिनट बाद आपकी बढ़िया मैथी खिचड़ी तैयार है - अब इसमें स्वादानुसार नमक डालें
थोड़ा सा बारीक कटा धनिया पत्ता बुरक कर हल्के हाथ से पानी के छींटे देकर पुनः 2 मिनट तक ढक दें
कढ़ाई नीचे उतार ले, ताज़े नींबू के रस और नारियल का बुरादा मिलाकर गरमागरम परोसें - यह स्वादिष्ट पाचक और स्वास्थ्यवर्धक है
इस अंकुरित मैथीदाना से आप सब्जी, बेसन या कुछ और व्यंजन भी बना सकते है, अन्य अंकुरित दालों के साथ कच्चा खाने में भी यह स्वादिष्ट लगता है
डायबिटीज, पेट के रोगों और जोड़ों के दर्द में यह बेहद उपयोगी और कारगर है
Image may contain: food

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

अदम गोंडवी की ग़ज़लें

अदम गोंडवी की ग़ज़लें............हिन्दुस्तान ने एक शायर ही नहीं खोया बल्कि एक मुकम्मिल इंसान खो दिया है जो लोगो से लोगो की बात कराता था.............और बस इसी तरह से लड़ते भिडते और मौत से भी जीत गया वो........किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई और किसी का मोहताज भी नहीं रहा धन्य है ऐसे अदम गोंडवी और धन्य है उनकी धारदार लेखनी.........नमन......... काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास मे उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 000 मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की? इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया सेक्स की रंगीनियाँ या ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...