Skip to main content

स्प्राउट चाट 14 Oct 2019

स्प्राउट चाट
Image may contain: food

जो भी साबुत अन्न हो आपकी रसोई में उसे साफ कर पानी में 10 से 12 घँटे गला दें, बेहतर होगा सुबह या रात को - मसलन, उड़द, चना, मोठ, चवले, मूंग, अरहर या सोयाबीन आदि
फिर इसका पानी निथारकर एक साफ कपड़े में बांधकर रख दें - वही 10 से 12 घँटे के लिए
आप देखेंगे कि ये अन्न अंकुरित हो गया है
अब इसे एक बड़े बाउल में डालकर बारीक कटा एक टमाटर, एक हरी मिर्च, काली मिर्च का ताज़ा कूटा पाउडर, स्वादानुसार नमक और आधा चम्मच ऑलिव ऑइल डालकर अच्छे से हिला लें, मैंने चाट मसाला बिल्कुल नही डाला है - आप चाहे तो डाल सकते है
बस खाईये , और क्या गज़ब का स्वाद और पौष्टिक , यदि आप चाहे तो दो काजू, दो बादाम, दो अखरोट और चार छोटी किशमिश डालकर इसे ज़्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट भी बना सकते है
आप इसमें और भी जोड़ सकते है अपने तरीके और मुझे सीखाएं भी
रात के समय यह हल्का, सुपाच्य और एकदम लाजवाब है - कोई मेहनत नही कोई सीखने की जरूरत नही और समय की भी बचत बस तालमेल रखना होगा गलाने के समय और कपड़े बांधने में
***
असल में सिर्फ चाय से दिक्कत नही है
चाय के साथ कुछ और भी हो तो ही मज़ा आता है वरना तो चाय भी बहुत है और चाय वाले भी
आईये कभी तो ....
● ग्रीन टी
● सामान्य चाय
● अदरख चाय
● इलायची चाय
● दालचीनी चाय
● लौंग चाय
● तुलसी चाय
● मसाला चाय
● जायफल चाय
● नींबू चाय
● शहद नींबू ग्रीन टी
● खालिस दूध चाय
● ब्लैक टी

अपने हाथ से बनाकर पिलाता हूँ, साथ में पौष्टिक चबेना भी मिलेगा कुछ ना कुछ

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...