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सुप्रीम कोर्ट जज लोया कि मौत के निर्णय पर और खरी खरी 16 से 20 अप्रेल 2018 के बीच

आज सफाई की
एक बोतल निकली
पतंजलि एलमोंड आयल की
कोई भूल गया था शायद घर मेरे जब गया तो
एकाध साल पुरानी थी
गजबै होई गय्या भिया
उसमे तेल नही था
तली में एक डेढ़ पाव शुद्ध खालिस बड़ेबड़े बादाम पड़े थे
छुपाकर रख दिये है
जा रिया हूँ कामदेव के आउटलेट पर , दो चार खरीद लाऊं जाके
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ये मीडिया के वो मूर्ख है जो मरे हुए लोगों का इस तरह सम्मान करते है
और वो भी तब जब मरा शख्स एक जज था
रोहित सरदाना संबित का ही वंशज है, यह सिर्फ घटिया पत्रकार नही दलाल है ,इसे रेड लाइट एरिये में ज्यादा कमाई होगी इसको बोलो कि मीडिया छोड़ दे और किसी और जगह जाकर मुंह काला करें ताकि कम से कम नये मीडिया के छात्र इसे अपना गुरु ना मान लें
इसका सीजेआई दीपक मिसरा , या जस्टिस माणिकराव खानविलकर संज्ञान लेंगे या इससे भी डरते है क्योंकि यह भी सत्ता का मुंह लगा है
मजेदार है कि दिल्ली के युवा और फेसबुक या ट्वीटर पर धाकड़ बन रहे पत्रकार और पत्रकारिता का रायता परोसकर युवाओं के सामने आदर्शवादी बनने वाले तथाकथित आईकॉन भी इस पर नही बोलेंगे क्योकि उनका भी बाप है ना ये। मेरी सूची में लगभग 35 % पत्रकार है और इनमे भी 5% दिल्ली के है जो चैनल्स से लेकर वेब पोर्टल चलाते है। ये भी बिके हुए है और सुधीर, रजत, रोहित या अर्नब के भांड है।

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संबित पात्रा आजाद हिंदुस्तान का सबसे बड़ा जोकर और मूर्ख है और दुर्भाग्य से यह दो ही लोगों का भोपू है - प्रवक्ता नही है सरकार का , कह रहा है कि इस सबके पीछे राहुल गांधी है - अबे समझदारऔर फर्जी डाक्टर, कांग्रेस बड़े खेल खेलती है - 56 साल का इतिहास पढ़ लें, नेहरू से लेकर राजीव और अब सोनिया और राहुल के खेल तुम जैसे टुच्चे नही है जो एक न्यायाधीश या किसी आध्वी साध्वी पर ऊर्जा खत्म करें , तुम लोगों को 4 साल में सत्ता का "स" ना आया बाबू
यह आदमी भाजपा को तो नही पर दो लोगों अर्थात मोदी और शाह के कब्जे वाली कम्पनी जिसका नाम देश/अंध भक्त भाजपा है - को डूबोयेगा। लिखकर रख लीजिएगा
अफसोस यह है कि राजनाथ, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज या सुमित्रा महाजन जैसे ताकतवर भाजपाई क्यों चुप है और ये संबित और रविशंकर प्रसाद क्यों हावी हो रहे है , इन बेचारों की क्या मजबूरी है ,क्या ये डाक्टर प्रवीण तोगड़िया की बुरी हालत देखकर अपना भविष्य सुरक्षित कर रहे है (डाक्टर तो यह संबित भी है )
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Unfortunately SC too is scared badly and don't want to be another Loya. Sad but true.. ultimately they are governed by governance .. 😢 what I could make out from the entire episode.
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समझ नही आ रहा मैं जस्टिस लोया की हत्या या मृत्यु की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिख रहा हूँ, एक जिम्मेदार और टैक्स भरने वाले नागरिक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया दे रहा हूँ, किसी कमीने हत्यारे के ख़िलाफ़ जांच की मांग कर रहा हूँ क्योकि इस सी जे आई की तनख्वाह में मेरे खून पसीने की कमाई का हिस्सा है उसकी सुविधाओं में मेरा नमक मिला है। सारे न्यायाधीश सार्वजनिक जीवन मे इस देश के निवासियों के प्रति जिम्मेदार अर्थात accountable है। सुप्रीम कोर्ट में है, वेतन लेकर काम करते है, कोई ख़ुदा नही है । यदि चाटुकारिता करेंगे किसी की भी डरकर तो क्या देश सवाल नही करेगा और तुम्हे क्यों मिर्ची लगती है बै - बाप है या ससुर ?
मैं अपने प्रधानमंत्री की समझ, लन्दन में बैठकर लीलावती कलावती टाइप उजबक कहानियों और शेखचिल्ली अदाओं को उजागर कर सवाल करता हूँ तो इन संघियों , भाजपाइयों और कम अक्ल ढपोर शंखियों को मिर्च क्यों लगती है। प्रधानसेवक देश का है किसी मुहल्ले का पार्षद नही, सवाल भी करेंगे और समालोचना भी- वो खुद कहता है ना 126 करोड़ गाली दे तो मुझे क्योकि हमारे जीवन के अहम निर्णय उसकी समझ और अक्ल पर टिके है, उसे गधों ने हांक लिया तो आम और गरीब लोगों के जीवन का क्या होगा ?
जाहिल, उज्जड गंवारों की तरह से यहाँ आ जाते है अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करने। या तो इन सारे पाप में तुम लोग प्रत्यक्ष शामिल हो , प्रधानसेवक तुम्हारा फूफा या ताऊ लगता है या तुम्हे देश से प्यार नही। और बलात्कार, हत्या, धमकी तुम्हारा स्वभाव और शगल है क्या बे?
अबे उ से उल्लुओं - फेसबुक पर अरबों खाते है , तुम जैसे उजबक हर तीसरे अकॉउंट में है। सी जे आई से लेकर प्रधानसेवक और तमाम पार्टियों के तड़ी पार के दिमाग़ से पैदल, फर्जी और असली अकॉउंट खोलकर बैठे है - वहां जाओ और विष वमन करो या दस्त - यहां नही। यहां सिर्फ दिमाग़ और स्वतंत्र बुद्धि वाले ज्ञान लेकर आये, भेड़ बकरी, लोमड़ी और रँगे सियारों से ना बात करूंगा - ना जवाब दूँगा। ज़्यादा समझ दिखाई तो ब्लॉक कर दूँगा- समझे घोलचू के घोल !!!
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों की छबि खराब हुई है 
समझ नही आता कि समाज मे जजों की छबि बची है ; -

जस्टिस लोया की मौत के फ़ैसले के बाद
एस सी एस टी एक्ट के बाद

हैदराबाद के निर्णय के बाद 
सुनील जोशी के हत्यारों के निर्दोष साबित होने के बाद
तीन तलाक के फैसले के बाद 
व्यापमं से मप्र सरकार मुक्त होने के बाद
चार जजों के बाहर आकर प्रेस वार्ता के बाद

आईये कैंडल मार्च निकालें
विक्रमादित्य के देश मे न्याय की बात करना कितना बेमानी हो गया है
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हे संजय, अम्बानी को बोलो कि नेट की स्पीड 7 जी कर दें और बेचारे अभिमन्यु को वाट्स एप पर चक्रव्यूह तोड़ने का वीडियो भेजो - (वो है तो कुलदीपक ही ना)
उस आदमी की तलाश करो जिसने दुर्योधन द्रोपदी कांड का वाइरल किया और ये कृष्ण यादव के पास कौनसी तकनीक है पता लगाओ जिससे उसने साड़ी की लड़ी लगा दी, इस तरह की तकनीक का टॉवर लगवाने के ठेका अडानी को दो। इस यादव के जाति प्रमाणपत्र की भी ई कॉपी लाओ आधार से मिलाकर देखते है।
इस युद्ध और इससे जुड़े सारे फुटेज सुधीर चौधरी, रजत और अर्नब को तुरन्त भेजो ताकि हवा हमारे पक्ष में बह सकें, गांधारी ने पट्टा खोलकर दुर्योधन को देखा वाला सीन एडिट कर देना सुधीर थोड़ा ज्यादा समझदार है - गुड़ गोबर ना कर दें।
और हां मार्क जुकरबर्ग को इसी सदी में पैदा करवाओ ब्रह्मा को आदेशित करो , बाकी अगली वीडियो कॉन्फ्रेंस दिन के चार बजे होगी।
विप्लब देव
त्रिपुरा नरेश
पुण्य भूमि भारत

[ कैसे कैसे नमूने हमने इस 21 वीं सदी में चुन लिए है , आत्महत्या के सिवाय जनता के पास कोई विकल्प भी नही है इस कन्फेशन के बाद , कसम से ]
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वैसे ईमानदारी से देखें तो मोदी एक प्रधान मंत्री तो दूर एक सांसद के रूप में भी कभी तर्कपूर्ण ढंग से बोल नही पाये संसद में
जब भी बोले कटाक्ष,मजाक या कुतर्क की भाषा ही बोलें है
राहुल गांधी ने सही में जो चुनौती दी है उसे स्वीकार करने की हिम्मत होना चाहिए मोदी में - एक सांसद और प्रधानमंत्री के रूप में यदि वे विशुद्ध घटिया राजनीति किये, तर्कपूर्ण ढँग से और देश की विभिन्न घटनाओं, योजनाओं और सरकार के एजेंडे पर बोलकर दिखा दें बगैर अपने उजबक चमचों, सदन की अध्यक्षा के तटस्थ अध्यक्षीय दायित्व के बरक्स और ठोस आंकड़ों के साथ तो चार साल के पाप धुल जाएं सम्भवतः
अगर वे अपनी तार्किक और देश हित की बुद्धि का इस्तेमाल सच मे करते है तो अकेले हिम्मत के साथ एक बार एक घँटे के लिए सबसे तार्किक और मीडिया का पर्याय बन चुके Ravish Kumar के साथ भी दिल्ली के लाल किले से देश भर के लोगों के सामने इंटरव्यू में आने का दमखम भी रखना चाहिए आखिर सुधीर और रजत में कौनसे और कहां हीरे लगे है और रवीश में काँटे
मोदी अगर इस जन्म में ये सब कर पाएं तो 16 मई 2014 को संसद की सीढ़ी चूमकर अंदर घुसने की नौटन्की को किसी हद तक सही माना जा सकता है , बाकी तो चौराहे - चौराहे पर चुनावी सभाओं को जितना भद्दा और असंविधानिक भाषा का प्रयोग कर लोगों को विदूषकों की तरह से हंसाने में भाषणों का प्रयोग किया और निर्णय लिए - चाहे वो बजट के हो या नीतिगत वह जग जाहिर ही है
बहरहाल , इंतज़ार करिये कि देश को कंगाल बनाकर विदेश में बैठकर विश्व को भाषण देकर क्या भला कर लौटते है और नगदी का क्या इंतजामात करते है - देखना ही होगा कि इनकी अर्थ शास्त्रीय समझ और आपातकाल में रणनीति क्या है
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उर्जित पटेल गिनती सीखा कि नही
बेटा बता - नोटबन्दी का हिसाब
यह भी बता कि अभी किल्लत क्यों है
और नही तो इस्तीफ़ा दें और निकल लें क्यों अमित शाह का खेल बिगाड़ रहा है 2019 का
मोदी जी कितना झूठ बोलोगे और कितना भागोगे देश की समस्याओं से और कब तक जुमलेबाजी करते रहोगे। होश है कि नही आपको - चार राज्यों में अभी चुनाव है और अगले साल आपकी भी अग्नि परीक्षा है। 370 से लेकर मन्दिर आदि छोड़ो, 15 लाख भी हम मुआफ़ करते है - हो जाता है अक्ल मारी जाती है तो आदमी कुछ भी बोलता है जैसे मप्र में भाजपाई बोलकर कुल्हाड़ी मार रहे है आप पर, पर गुरु मेरी मेहनत का जो चन्द रुपया जमा है उसे तो निकालने दो, कल किसी बिटिया के ब्याह में जाना है, किसी बहू को मुंह दिखाई देनी है , एक ढोल बजाने वाले को शगुन देना है , बाबू हलवाई के पेड़े नही खरीदे तो उसका चूल्हा नही जलेगा, मंगला भाभी की चूड़ी की दुकान है जिससे वह अपने लकवाग्रस्त पति का इलाज करवाती है।
कुछ शर्म हया बाकी हो तो बैंकों के लोगों की इज्जत बचा लो जो गाली खा रहे है दिनभर एक हफ्ते से। लौट आओ विदेश से पूरी दुनिया को भाषण देने के बजाय घर के लोगों का काम कर दो।
मोदी मोदी मोदी कहकर ये लोग पागल थे अब चुप है और निराश है।
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2000 के नोट सबसे ज्यादा भाजपा दबाकर बैठ गई है। यह बनाया ही इसलिए था, दुनिया का गधे से गधा कह सकता है जितना बड़ा नोट उतना भ्रष्टाचार पर हमारे यहां तो हर शाख पे बैठे है।
4 राज्यों के चुनाव और फिर केंद्र में 
तड़ीपार के चुनावी गणित है।

ईवीएम , 2000 के नोट, न्यायाधीशों की हत्या या इस्तीफ़े और अंत मे कुछ नही तो हल्ला बोल - इसे ही साम, दाम , दण्ड और भेद कहते है हिन्दू राष्ट्र में।
मोदी कुछ नही बोलेंगे क्योकि किडनी फेल है, पाँव विदेश में और उर्जित को जमा हुए नोटों की गिनती भी नही आती।
हर मोर्चे पर असफल 
अबकी बार फिर 
निकम्मी सरकार

#खरी_खरी 

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