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देवास मे योगेश केलकर का एकल बांसुरी वादन....



देवास की समृद्ध सांगीतिक परम्परा मे और उस्ताद रज्जब अली खां साहब जैसे महान संगीतकारों के देवास मे आज एक नाम और जुड़ गया जब देवास मे कालानी बाग मे एक प्राईवेट महफ़िल मे अनुज योगेश केलकर ने एकल बांसुरी वादन प्रस्तुत किया. योगेश देवास से ही है, और मेरा परिचय सं १९८४ का है. हम दोनों लोग कालानी बाग मे ही रहे है, अब योगेश ड़ा राजा रमन्ना प्रौद्योगिक केन्द्र, इन्दौर मे वैज्ञानिक अधिकारी है पर देवास से जुड़ाव अभी भी बना हुआ है.

आज योगेश ने बांसुरी के सुर छेडकर यह सिद्ध किया कि संगीत भक्ति के सबसे करीब है और संगीत की साधना से ही अपने इष्ट को पाया जा सकता है. राग हंस ध्वनि से शुरूवात करके मीरा के दो भजन सुनाये, साथ ही रात्री के प्रथम पहर के राग यमन मे एक जोरदार बंदिश सुनाई. योगेश ने शर्मा बंधू कृत राम दरबार का प्रसिद्द भजन "जैसे सूरज की गर्मी से तपते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया" भी सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया. बहुत ही अपनत्व भरे माहौल मे हुए इस कार्यक्रम मे योगेश के साथ तबले पर संगत की अनिल पवार ने जो देवास के ख्यात कलाकार है.

यह कार्यक्रम सिर्फ यह दिखाता है कि हमेशा बड़े लोग, बड़े आयोजन, बड़े बैनर, बड़े कलाकार, बड़ा नाम और बड़े श्रोता ही नहीं बल्कि बेहद अपनत्व वाले छोटे कार्यक्रम भी बहुत महत्वपूर्ण, रुचिकर और यादगार होते है. आज योगेश को देखकर बहुत खुशी हुई उनकी बिटिया ने जिस भाव से संचालन किया वह भी बहुत महत्वपूर्ण था. जियो भाई जियो..............
— with Salil Zokarkar and Yogesh Kelkar in Dewas.

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