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प्रशासन पुराण 62

मध्य प्रदेश का आज स्थापना दिवस था.बेचारे बच्चे हमेशा से ही सोफ्ट कॉर्नर रहे है,  हर सरकारी एवं दरबारी कार्यक्रम के सो आज भी यही हुआ..........पहले सुबह से रैली फ़िर डाट-डपट, अंत में सजा-धजाकर अतिथियों के सामने नाचने गाने खडा कर दिया.  हद तों तब हो गई जब जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने केबिनेट मंत्री को मुख्य मंत्री कह दिया पुरे होशो हवास में और भावावेश में एक ऐसी कविता पढ़ी जिसमे उन मंत्री महोदय और मुख्य मंत्री की तारीफ़ के पुल बाँधे गये थे. इन जिला अधिकारी के परिचय में कहा गया था कि ये वीर रस के कवि है और राष्ट्रीय स्तर तक इनकी कविता की तूती बोलती है. याद आया कि जिलाधीश के कमरे में होने वाली हर टी एल बैठक में जब कोई भी अधिकारी इनसे कुछ भी पूछता है तों इन्हें सांप सूंघ जाता है और मरी सी मिमियाती आवाज में जवाब देते है. हाल ही में एक ब्लाक के एक मास्टर को इन्होने सस्पेंड कर दिया था तों उस मास्टर ने आठ दिन में इनकी छाती पर बैठकर अपना निलंबन वापिस करवा लिया......बाद में इन्होने आज इसी मंच से लडकियों के एक नृत्य के पहले एक शेर पढ़ा.......

"एक पौवा चढ़ा लेता है तों
आदमी भी शेर नजर आता है"

और फ़िर नृत्य हुआ और उपस्थित जनों ने जमकर तालियाँ बजाई............

जय हो मध्य प्रदेश फ़िर वही बात कि एम पी अजब है, सबसे गजब है. कुछ हो ना हो पर इन जिला शिक्षा अधिकारी को मुझे लगता है दो साल का एक्सटेंशन जरुर मिल जाएगा क्योकि ये आगामी दो माह में रिटायर्ड हो रहे है. हाँ इस पुरे अनूठे कार्यक्रम में जिले के बाकी सब मौजूद थे बस भारतीय प्रशासनिक सेवा के जिम्मेदार अधिकारी बनाम "लोक सेवक" नहीं थे वे छुट्टी पर थे गजब..............!!! (प्रशासन पुराण 62)

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