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मरने वालों के साथ कोई मरता नहीं

जब दर्द नहीं था सीने में तब ख़ाक मजा था जीने में
अबके सावन हम भी रोये सावन के महीने में,

यारों का गम क्या होता है मालूम न था अनजानों को
साहिल पे खड़े होकर हमने देखा अक्सर तूफानों को
अबके शायद हम भी रोये मौजों के सफीने में

ऐसे तो ठेस ना लगती थी जब अपने रूठा करते थे
इतना तो दर्द ना होता था जब सपने टूटा करते थे
अबके शायद हम भी रोये सावन के महीने में

इस कदर तो कोई प्यार करता नहीं
मरने वालों के साथ कोई मरता नहीं
आपके सामने मै ना फ़िर आउंगा
गीत ही जब ना होंगे तो क्या गाऊंगा
मेरी आवाज़ प्यारी है तो दोस्तों
यार बच जाये मेरा दुआ सब करो
दुआ सब करो.........
http://www.youtube.com/watch?v=du2m9D_NWFg

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