जीवन विरोधाभास, द्वंद और सच्चाई की डोरी पर चलने का नाम है, हमें अक्सर उन स्थितियों, अवसरों, जगहों और लोगों के बीच रहना पड़ता है - जो इस डोरी को दोनों सिरों पर मजबूती से थामे बैठे है और साँस रोककर हमारे फिसलने और गिरने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहें हैं कि हम गिरें और वे तालियाँ बजाते हुए पुट्ठे की धूल झाड़ कर हमारी लाश के पास आकर च - च - च करते रहें मज़ेदार यह है कि अपरिग्रह, अस्तेय, अहिंसा का लबादा ओढ़कर जीवन चलाने वाले सबसे ज़्यादा भ्रष्ट, हिंसक और घातक है, तमाम सत्यशोधक बाशिन्दे झूठ के मैले आँचल तले अपने सुहाने स्वप्न बुनकर भरपूर ज़िन्दगी जीने के उपक्रम में लगे हैं, जो लोग घर - परिवार - शासन - प्रशासन और समाज की संस्थाओं या समुदायों में बुरी तरह से असफ़ल होकर नज़ीर बन गए - वे नेतृत्व की दिशा और डोर थामे बैठे है और नेतृत्व सीखाने के विश्वविद्यालय बन रहे है जो लोग ईमानदार, संस्कृति मूलक समाज और उन्नत भविष्य के सपने सँजोये समाज के अगुआ बनने को उद्धत थे, वे सबसे ज़्यादा बेईमान, भ्रष्ट, परम्परा और पाखण्ड फ़ैलाने की अग्रिम पँक्ति में शामिल है, जो समग्रता, एकाग्रता, भिन्नता और समष्टिवाद के पुरोधा थे -...
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