Skip to main content

Drishta kavi 21 Dec 2019

"बहुत दिन कुछ मज़ा नही आ रहा "
"कवि गोष्ठी रख लो, यार दोस्त भी आ जाएंगे मिलना जुलना हो जाएगा और ठिलवई भी झकास वाली..."
"सई है भिया और उसको जरूर बुलाना , गज्जब की लोच है आवाज़, शरीर और कविता में..."
"एक कट चाय और कुत्ता भी ना खाएं वो मैरी के दो बिस्किट जितना सस्ता मनोरंजन और कही होगा क्या।।"
पर्दा गिरता है और ठहाका बजता है
***
"तो फिर क्या करें बुलाना तो पड़ेगा और वो छोड़ेगा भी नही, निरीक्षण तो करेगा ही साला"
"एक काम करो - बड़े बाबू ने बोला, दोपहर में ही एक कविता गोष्ठी रख लो - लंच के तुरंत बाद, अधिकारी है ससुरा कविता तो लिखता ही होगा, पूरे मुख्यालय के बाबू, पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मियों और चपरासियों को बुला लो - भीड़ देखकर खुश होगा"
"सही है बड़े बाबू , आपको अनुभवी यूंही नही कहते लोग" , गिरधावर समोसे वाले को सेट करने चल दिया था और एसडीएम मुस्कुरा रहा था"
***
"देखिए ये फेसबुक नही कि आप छह सात कविताएं पेल दें और फिर हर दो कविता के बीच ज्ञान भी दें " - संचालक भुनभुनाया
"बस दो और कविताएं जो मल्लिका ए हुस्न के लिए खास लिखी है " - दूर देश का कवि था जो किसी सरकारी कॉलेज में अँग्रेजी का मास्टर था और लोक लुभावन हिंदी कविता रचता था
"अबे उठ ना, साले वो बुढ़िया तीन नाती - पोतों की दादी है और उसकी पांच जीवित संतानें है सबका ब्याह हो गया है, रिटायर्ड हो गई है " - संचालक माईक पर ही बोला
"अरे पर उसकी काली जुल्फें और कजरारे नैन "- कवि बोला
"अबे साले सात रूपये का गोदरेज रंगीला लगाती है और लक्स का नखरा पोतती सुबह उठकर , माईक बंद करो रे और बजरंग भिया को बुलाओ, साला उठेगा नही माईक के सामने से तब तक, ये मास्टर कवि भी ना...." - संचालक भुनभुनाया हुआ था
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास

शिवानी (प्रसिद्द पत्रकार सुश्री मृणाल पांडेय जी की माताजी)  ने अपने उपन्यास "शमशान चम्पा" में एक जिक्र किया है चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास अवगुण तुझमे एक है भ्रमर ना आवें पास.    बहुत सालों तक वो परेशान होती रही कि आखिर चम्पा के पेड़ पर भंवरा क्यों नहीं आता......( वानस्पतिक रूप से चम्पा के फूलों पर भंवरा नहीं आता और इनमे नैसर्गिक परागण होता है) मै अक्सर अपनी एक मित्र को छेड़ा करता था कमोबेश रोज.......एक दिन उज्जैन के जिला शिक्षा केन्द्र में सुबह की बात होगी मैंने अपनी मित्र को फ़िर यही कहा.चम्पा तुझमे तीन गुण.............. तो एक शिक्षक महाशय से रहा नहीं गया और बोले कि क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों है ? मैंने और मेरी मित्र ने कहा कि नहीं तो वे बोले......... चम्पा वरणी राधिका, भ्रमर कृष्ण का दास  यही कारण अवगुण भया,  भ्रमर ना आवें पास.    यह अदभुत उत्तर था दिमाग एकदम से सन्न रह गया मैंने आकर शिवानी जी को एक पत्र लिखा और कहा कि हमारे मालवे में इसका यह उत्तर है. शिवानी जी का पोस्ट कार्ड आया कि "'संदीप, जिस सवाल का मै सालों से उत्तर खोज रही थी व...