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भारत हमको जान से प्यारा है, सबसे प्यारा गुलिस्ता हमारा है.......

भारत हमको जान से प्यारा है, सबसे प्यारा गुलिस्ता हमारा है.......

अरविंद ने बिजली के बिल फाड़े, पचास हजार लोग दिल्ली के ओर कूच कर रहे है दो गज जमीन के लिए, राबर्ट वाड्रा घपले में शामिल, अन्ना का आंदोलन फेल, गैस के भाव बढे, एफ डी आई का प्रवेश, सारे नेता और सरकार भी सरकार से नाखुश, कोयला घपला, छोटी बेटियों के साथ लगातार बलात्कार और हत्याएं, कुपोषण से छोटे बच्चों की मौतें, सद्य प्रसूताओं की मौतें, युवाओं में देश के प्रति विरोध लगातार आक्रोश बढ़ रहा, इरोम शर्मिला का ग्यारह बरसों से लगातार अनशन जारी, सरकार में लोग और मंत्री गण अपने इलाज के लिए लगातार विदेश दौरों पर, रिटायर्ड राष्ट्रपति पर उपहार में मिले उपहारों पर वापसी के लिए आदेश जारी, आरुशी हत्याकांड के अपराधी अभी भी बेखौफ घूम रहे है, सरकारों के मंत्री कई कई प्रकार के कांडों में लिप्त, खाप पंचायतों का कहर जारी, देश में पुलिस नमक व्यवस्था ध्वस्त, सेना के अधिकारी भी भयानक किस्म के षडयंत्रों में शामिल, फिल्मों का सुनहरा दौर, सोशल मीडिया पर लेखकों की भीड़, प्रधानमंत्री चुप, राष्ट्रपति चुप, राज्यपाल चुप, लोकसभा ठप्प, राज्यसभा ठप्प, विधानसभाओं में जूते - चप्पल, पंचायतों में ग्राम सभाओं की नौटंकी और घोर हिंसा, प्रशासन नपुंसक और धन बटोरने में बेहद व्यस्त......

आईये हाथ उठाये हम भी, हम जिन्हें रस्में दुआ याद नहीं,
हम जिन्हें सोज़े मुहब्बत के सिवा कोई बुत कोई खुदा याद नहीं.

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हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...