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निम्न और माध्यम वर्गीय लोगो को झूठे सपनों के छल



करोडपति के कार्यक्रम में सुशील कुमार को मार्केट ने अमिताभ के बहाने बार बार ओकात याद दिलाई कि तुम साले मोतिहारी के हो, मात्र छः हजार हर माह कमाते हो, और तुम्हारे निम्न वर्गीय सपनों को सिर्फ यही कार्यक्रम पूरा कर सकता है साथ ही एक करोड जीतने पर पूरा मामला भावुक बना दिया सबसे मजेदार यह है कि इसमे पंकज पचौरी भी आंसू बहा रहे थी सही में या नाटक था मुझे नहीं पता पर यह सब किसी के स्वाभिमान पर चोट करने जैसा था और सुशील कुमार बहुत सहजता से सब झेल रहे थे.....खैर निम्न और माध्यम वर्गीय लोगो को झूठे सपनों के छल से छलने का खेल जारी है और सुशील कुमार जैसे लोग जीतकर मार्केट को और मजबूत कर रहे है, लोग मात्र 122/- (NREGA) की मजदूरी पाने के लिए उम्र लगा देते है पर यहाँ मुफ्त का रूपया बट रहा है....दोस्तों अब ये मत कहना कि लोमड़ी को अंगूर नहीं मिले तो...........
आप सबका शुक्रिया पर मित्रों मेरे सवाल ज़रा बड़े है और व्यापक है क्या मोतिहारी देश का हिस्सा नहीं है या सारे छोटे कस्बे देश नहीं है क्या बुद्धिजीविता का ठेका दिल्ली बंबई ने ले रखा है क्या ? या अम्बानी, टाटा को रूपयों की भूख नहीं है.........?खुद अमिताभ भी तो इसी निन्यानवे के फेर में हरदम पड़े रहते है तो फ़िर सुशील या कोई और टारगेट क्यों क्या इसलिए कि वो ओफार पर चले आये है सार्वनाजिक बेइज्जती करवाने ..............?

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