बेहद गमगीन उदास शाम के बीच याद आए फ़ैज़ ___________ हज़ारों ना-मुक्कमल हसरतों के बोझ तले ये जो दिल धड़कता है कमाल करता है • फ़ैज़ *** संघर्ष नहीं जिनके जीवन में वे भी बड़े अभागे होंगे, या तो प्रण को तोड़ा होगा या रण से भागे होंगे *** दूर कही एक रात आहिस्ते से उतरती है और अपने आगोश में पूरे परिवेश को लेती है मैं खोजता हूँ तुम्हें धीरे से सरकती है रात चांद अपने उरूज पर है *** राहुल को अब किसी कॉमेडियन को मंच पर बुलाकर सस्ती कॉमेडी करवाने से बचना चाहिए, यह सिर्फ हंसी - ठिठोली के लिए ठीक है, पर पूरी बातचीत, संवाद और गंभीर मुद्दों पर बात होती है - वे वही रह जाते है और यह ठिठोली साथ चली जाती है, मीडिया भी यही प्रसारित करता है दूसरा, किसी भी व्यक्ति से बैर भाव रखना ठीक हो सकता है, पर लोकतंत्र में संविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का सार्वजनिक रूप से इस तरह से मंच पर मजाक उड़ाना स्वस्थ परम्परा नहीं है कांग्रेस और उससे जुड़े लोगों को यदि इतनी समझ नहीं तो पहले अपने जाले साफ़ करें फिर वे गूँज या जयकारे आयोजित करें *** कलेजे पे साँप लोट रिये होंगे अस्सी पार मिल मज़दूर के बेटे के नाम पर राजनीति करने वाल...
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