रज़ा के बैनर में अपने एमपी के आदिवासी जिले में मण्डला में "युवा" हो रहा है जिसमे 80 % चुके हुए प्रौढ़ और बूढ़े आ रहे है , कुछ "बंधुआ युवा" नही जा रहें - हो सकता हो रिटायर्ड मेन्ट की तारीख नजदीक हो या शुगर बढ़ी हो - पेशाब पानी मे दिक्कत होती ही है लम्बे सफर में, अपुन को अनुभव है ना मराठी, पंजाबी, मलयाली कवियों पर बोलना है इन तथाकथित युवाओं को, परन्तु मजेदार यह कि बोलने वालों में एक भी मूल भाषा के लोग नही है, खेल सिर्फ़ उपकृत करने और कराने का है जैसे मराठी भाषी नही है तो ये क्या बोलेंगे अरुण कोल्हाटकर पर , जो मूल भाषा का गोड़वा है मराठी में अरुण कोल्हाटकर को समझ कर व्यक्त करने का वो किसी पराई भाषा मे कैसे होगा अयप्पा पाणिक्कर मलयाली है पर बोलने वाला कोई मलयाली नही, ले देके एक पंजाबी कवि पर बोलने में ही कोई पंजाबी लड़का है शायद - बाकी तो सब "सौजन्य से सभी ख़ुश रहते है" - वाला फार्मूला है पिछली बार का याद है अलग - अलग कलाकारों पर किसी - किसी को बोलना था, कुछ मदद मैंने की, और बाकी लिंक्स से कॉपी पेस्ट, गूगल देव का सहारा लिया गया था और इस तरह से पूर्णाहुति हुई थी, ख़ैर ...
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