2nd Oct 2020 गांधी 150 का आज अंत ◆◆◆ 2 अक्टूबर अब देश में पाखंड और मजबूरी है, गांधी की प्रासंगिकता तो शाश्वत है पर जयंती मनाना कितना बड़ा झूठ है यह सब जानते है अब सत्य, अहिंसा, अपरिमेय या बाकी और सिद्धांत भी अब महज औपचारिकता नही क्या और उपर से सत्ताओं के खेल, आज़ाद भारत का सिर्फ़ 74 वर्षों में देशी लोगों के हाथों में बिक कर गुलाम और दो लोगों के हाथों पराधीन हो जाना, सत्ता का सांप्रदायिक हो जाना, स्वच्छता के नाम पर खरबों रुपयों के घोटाले, प्रतिशोध और हिंसा का तांडव हर गली मुहल्ले में - आखिर क्या शेष रह गया है गांधी के नाम पर शास्त्री का नाम ही मत लो - जय जवान और जय किसान ही आज सत्ता के निशाने पर है दुनाली में एक जवान और एक किसान - ट्रिगर हाथ में लिए सत्ता के भेड़ियों ने तन से धोती छीन ली और दाल के पानी में से दाल गायब कर दी; सेना और खेती दोनों राजनीति के मल्लयुद्ध में परास्त और हताश है और किसी के पास कोई जवाब नही बहरहाल, ना शैव बचें ना वैष्णव और अपनो परायों को पीर देने में इनका कोई सानी नही, मोहमाया का बंधन जरूर शेष है - और सिर्फ सत्ता ही नही गांधीवादी भी इसी सबमें रच बस गए है - सारे ग...
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