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Blood Bank Contact List of Indore , MP

Blood Bank Contact List of Indore , MP

श्मशान सा समर्पण भाव और सफाई अभियान

आज देवास के श्मशान में जब भाई की अस्थियाँ समेट रहे थे तो वहाँ तीन और परिवार के लोग आये हुए थे और उन्होंने बड़े करीने से सारी अस्थियाँ समेटी, बल्कि हम सबने समेटी, फिर हमने जगह को झाडू से साफ़ किया, साफ़ पानी का छिड़काव किया, फिर एक बाल्टी में पानी के साथ गोबर और गो मूत्र मिलाकर उस स्थान को स्वच्छ किया और फिर कुछ अगरबत्ती लगाकर उस जगह को एकदम पवित्र बनाने की कोशिश की यानी हाईजिनिक किया. मुझे लगा कि अगर हम उस जगह को इतनी साफ़ कर देते है जिसका उपयोग हमारे जीते जी हम खुद के लिए नहीं क र पायेंगे, और भावना यह रहती है कि कोई दूसरी लाश आयेगी तो उसे साफ़ जगह मिलना चाहिए इसलिए हम सारे लोग बिलकुल भिड जाते है और सफाई में कोई कसर नहीं रखते, क्या हम अपने सार्वजनिक स्थलों को साफ़ नहीं रख सकते? वही याद आया कि देश में सफाई की बड़ी बड़ी बातें हो रही है नई झाडुएँ खरीदी जाकर मीडिया में छा जाने को नौटंकी निभाने की रस्में अदा की जा रही है और जिस गांधी को मारकर राजनैतिक सफाई की दुहाई पिछले सत्तर बरसो से दी जा रही थी, यकायक उसी गांधी को दुनिया में बेचकर और देश में २ अक्टूबर से सफाई का बड़ा काम हाथ में लिया जा ...

संगीत नाईक "बाबा" का गुजरना यानी सहोदर के बिछड़ने का स्थाई दुःख

जीवन   बहुत कठोर होता है और परसों (27/9/2014) आखिर में मौत ने फिर घर देख लिया और मेरे सगे छोटे भाई  संगीत नाईक जिसे हम प्यार से और पूरा देवास "बाबा" कहता था, को अपने आगोश में ले लिया.  पिछले   बारह वषों से जिस जीवन की लम्बी लड़ाई वो लड़ रहा था, अपने दोनों गुर्दे खत्म होने के बाद भी जिस हिम्मत और आशा से उसने लम्बी लड़ाई लड़ी और मौत को हर बार चकमा दिया, परसों आखिर सात दिनों अस्पताल में घेर घार कर मौत ने उसे दबोच ही लिया.  मेरे   जीवन में उसे मैंने बचपन से प्यार ही नहीं दिया एक पिता की भाँती उसे पाला  और उसके हर पल में मै उसके साथ रहा. तुलसीदास जी कहते है कि जग में सहोदर जैसा कोई नहीं हो सकता और अब मै यह जब आज लिख रहा हूँ तो कुछ शब्द मानो खो गए और वाणी थक से गयी है. बस इतना ही कि मुझे अकेला छोड़कर वो एक लम्बी दूरी पर अनथक यात्रा के लिए निकल गया है अकेला और हम सब बेहद अकेले रह गए है अब.  मै   बहुत शुक्रगुजार हूँ लाईफ लाइन अस्पताल इंदौर के पुरे स्टाफ का जिहोने इन बारह वर्षों की लड़ाई में हमारा साथ दिया, इंदौर के सभी पैथोलोजिकल प्रयो...

‘नाकोहस’ by Purushottam Agrawal

सपने में वह गली थी, जहाँ बचपन बीता था। सड़क से शुरु हो कर गली, चंद कदम  चलने के बाद चौक पर पहुँचती थी, जहाँ मोहल्ले का घूरा था और जहाँ होली जला करती  थी। यहाँ से तीन दिशाओं की ओर सँकरी गलियाँ जाती थीं। सामने की ओर जाने वाली गली में आगे चल कर एक और चौक आता था, जहाँ मंदिर और मजार का वह संयुक्त संस्करण था, जिससे वह गली अपना नाम अर्जित करती थी। सुकेत ने देखा, उस गली से एक मगरमच्छ आ रहा है,  रेंगता हुआ, दुम इत्मीनान से मटकाता हुआ, गली की छाती पर मठलता हुआ, आता है घूरे वाले चौक तक। अरे, सुकेत पहली बार देखता है कि यहाँ एक हाथी लेटा हुआ है, मगरमच्छ हाथी की एक टाँग चबाना शुरु कर देता है,  हाथी छटपटाता है, लेकिन जैसे जमीन से चिपका दिया गया है, केवल चीख सकता है, अपनी जगह से हिल नहीं सकता। इसी बीच दूसरी गली से एक और मगरमच्छ आता है, हाथी की दूसरी टाँग पर शुरु हो जाता है। हाथी की दर्द और दुख से भरी चीखें जारी हैं, वह शायद वैकुंठवासी नारायण को ही पुकार रहा है, जैसे पुराण-कथा में पुकार रहा था, किंतु या तो चीखें वैकुंठ तक पहुँच नहीं रहीं, या नारायण को अब फुर्सत नहीं रही। ज...

दृष्टिकोण का फ़र्क

दृष्टिकोण का फ़र्क बहुत समय पहले की बात है ,किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अ पने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था . उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था . सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया , उसने किसान से कहा , “ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ?”  “क्यों ? “ , किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?” “शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था...

लाल सलाम कामरेड

कामरेड को पूंजी से सख्त नफ़रत है और वो परिग्रह, पूंजी, जमीन जायदाद के भी खिलाफ है ..................... परन्तु कामरेड को दोस्त ऐसे चाहिए जिनके पास..... 1) कार हो जो कामरेड को घूमा फिरा दें 2) शराब की पार्टियां दे सकें 3) कॉफ़ी हाउस में नियमित ले जा सकें 4) गाहे-बगाहे उधार दे सके और कामरेड लेकर भूल जाएँ 5) हमेशा अपने खर्च पर घूमने फिरने ले जाए 6) दोस्तों की नौकरी ऐसी रुतबे वाली हो कि फटीचर कामरेड की चल निकले 7) कामरेड किसी भी दोस्त पर जूँ और पिस्सू की तरह से चिपककर शोषण कर सके 8) किसी खटमल सा खून पी सके अपने दोस्तों का 9) कामरेड की कविता पाठ कहानी पाठ का खर्च दोस्त उठायें 10) कामरेड की घटिया किताबों को दोस्त बेचें और खरीदें 11) कामरेड पूंजी को गाली दें शादी ब्याह को और समाज को गाली दें पर यही सब उसे महान बनाए और तोकते फिरे हर जगह कि तुम महान हो समर्पित कामरेड 12) कामरेड के बच्चों की फीस यही पूंजी वाले दोस्त भर दें 13) कामरेड की सिगरेट और दारु का खर्च अमीर दोस्त उठाये 14) कामरेड बीमार हो तो दोस्त तीमारदारी करें 15) कामरेड कही से मारकर कुछ भी लिख दें द...

मित्र के साथ बगैर किसी स्वार्थ के लम्बी बातचीत - शुक्रिया रत्नदीप.

बड़े दिनों बाद एक शाम खुशनुमा हुई और खूब बातें की, देवास में शायद ही ऐसी कोई शाम बीती हो कभी . असल में अब दिक्कत यह हो गयी है कि कोई फोन करता है तो कहता है कि मिलना है तो काम के अलावा कुछ नहीं कहता - मसलन नौकरी लगवा दो, फलां सुनील भाई से आपकी दोस्ती है तो वहाँ नौकरी का जुगाड़ करवा दो, रिज्यूम भेज देता हूँ, एनजीओ के प्रोजेक्ट्स लिख दो या फंड दिलवा दो, भाई को कही लगवा दो, कुछ उधार मिल जाएगा क्या, वो एक अखबार के लिए कुछ लिखा था उसे ठीक कर दो, अनुवाद करवाना था, एक पार्टी दे दो दारु  की, कवितायें लिखी है छपवाना है किसी जगह छपवा दो, या कुछ और अजीब तरह के काम बताकर लोग, तथाकथित दोस्त लोग मिलना चाहते है. ग्लोबल होती दुनिया में छोटे कस्बों के लोगों के एक्सपोजर बड़े हो गए है जाहिर है उम्मीदें भी बड़ी और माशा अल्लाह ज्यादा ही बड़ी हो गयी है, और मै ठहरा छोटा आदमी और गैर संपर्कों वाला, ना सिफारिश करता हूँ, ना पसंद करता हूँ कि सिफारिश बन जाऊं. लोग दोस्ती रिश्तों को दुहना चाहते है और यदि आप उनके काम के नहीं तो दूध में से मख्खी की तरह से निकाल फेकेंगे और पीठ पीछे ना जाने क्या क्या बात क...