Skip to main content

Khari Khari, Drisht Kavi and other posts from 8 to 9 August 2024

तार्किक रूप से कमजोर और विशुद्ध ठरकी किस्म का सभापति आज तक नही देखा जो कह रहा है - "an actor is subject to director", वह यह भूल गया कि वह खुद अपने दो आकाओं और दो A -1, A - 2 की कठपुतली है
क्या लोकसभा और क्या राज्यसभा दोनो जगह अध्यक्षों को समझ नही आ रहा कि सदन कैसे चलायें, बौरा गए है दोनों, क्योंकि आका कुछ और कहते है और सदस्यगण तर्क और तथ्यों से निरुत्तर कर दे रहें है, सिवाय दादागिरी और बैठक स्थगित करने के और कुछ कर भी नही कर सकते, ज्यादा से ज्यादा क्या करेंगे बर्खास्त कर देंगे
ये जया बच्चन की या किसी राहुल की क्या बराबरी करेंगे, जया विदुषी है उसने बड़ी दुनिया देखी है, ऐसे कूप मण्डूक राजनीतिज्ञ जो मोहल्लों की टुच्ची राजनीति करने वाले, नगर निगमों में टेंडर पास करवाने वाले क्या समझेंगे तर्क,आंकड़ें, जेंडर, बहस, सार्थक चर्चा या लोकतंत्र, दस साल में इन्हें तानाशाह के आदेश मानने और तार्किक ढंग से बोलने वाले को बर्खास्त करने की अक्ल है बस और इनकी समझ भी वही तक जाती है, ये भूल जाते है कि पितृसत्ता अब नही चलेगी - सदन में जया हो या महुआ माझी, राहुल या अखिलेश, ऐसे लोग है जो इनके षडयंत्र और फर्जीवाड़े की धज्जियाँ बेख़ौफ़ उड़ा सकते है
जया बच्चन ने सही कहा कि आप ऊपर भले बैठे हो पर हम सब कूलीग्स है यह बात मत भूलिये - बस मिर्ची लग गई दद्दा को क्योंकि एक महिला बोल कैसे सकती है, उम्र हो चली है घर क्यों नही बैठते
अभी तो शुरुवात है बाबू, पाँच साल में पसीना आ जायेगा

***
कल रात से डाइट में
◆ आधी रोटी
◆ आधा कटोरी रबड़ी
◆ एक गुलाब जामुन
◆ एक बंगाली मिठाई
◆ खोवे की दो मिठाई
◆ एक कटोरी खीर
◆ दो पापड़ एवं अचार
◆ डेढ़ पाव सेव
◆ आधा कटोरी मिक्चर
◆ आलू केले के चिप्स दो कटोरी
◆ दो कप सलाद
◆ आधा लीटर कोल्डड्रिंक
◆ डेढ़ सौ ग्राम मोदी पकौड़े
◆ दो चम्मच चटनी
◆ टमाटर सॉस
◆ केले, पपीते, आम, पाइनापल, लीची, कीवी, खजूर और मौसमी फलों की मात्रा कम कर दी है
नोट - ड्राय फ्रूट्स और एक लीटर हल्दी वाला दूध और 6 अंडे कम नही कर सकता नही तो कुपोषित हो जाऊंगा, ये कम करने का कोई बोलना मत
____
अब ज्ञानीजन बोलें - 100 ग्राम कम हो जायेगा ना
क्या फ़ायदा सरेआम इज्जत उछल जाए, इससे तो बेष्ट है कंट्रोल यारां कंट्रोल
***
जो ससुरे कल तक बांग्लादेश विशेषज्ञ थे, आज सगरे के सगरे ओलंपिक के नियम, कुश्ती के परम ज्ञाता, डाइटीशियन और फिजियोथेरेपिस्ट बन गए है
ज्जे बताओ भैया और भैंजी लोग्स - तुमसे घर में दो बाल्टी तो पानी भराता नही, एक क्विंटल का बाट बनकर बैठे हो - पूरे मुहल्ले वाले गेहूँ तौलने ले जाते है भैया को और आंटीजी आप तो ज्ञान मत ही दो, क्योंकि आपके वजन से शुगर और बीपी दोनो पारा तोड़कर बाहर आ गये है, दिनभर हाय-हाय पूरा मुहल्ला सुनता है आपकी, VLCC जाकर पति को गंजा कर दिया पर एक ग्राम कम नही हुई आप
बात बॉडी शेमिंग की नही पर जो रायता आप लोग फ़ैला रहें हो और हिसाब मांग रहें ना कोच, स्टॉफ और गये हुए अधिकारियों के दल से - आपकी हैसियत क्या है, किस आधार पर आप हिसाब मांग रहें है और यह अथॉरिटी दी किसने आपको, दसवीं - बारहवीं पास या दो कौड़ी की राजनीति, समाजशास्त्र या हिंदी में चाटुकारिता से शोध करके कौन से ज्ञानी बन गये तुम
हिंदी के सुकोमल और सुकोमलांगी कविगण आप तो अपना ध्यान सेटिंग में लगाओ - उसमें तो आप डायमंड ले आते हो - गली या मुहल्ला हो या मालदीव, फिर काहे यहाँ भसड़ फ़ैला रहें हो, ज़रा सस्ते में निपटा लो - भारत और पेरिस में है ना एक पूरी समिति, दुनिया भर में अदालतें और मीडिया के दल्ले - तुम काहे मुंह काला कर रहे है यहाँ
सीधी बात है गुरू, ज़्यादा ज्ञान तो पेलो मत, तुमसे चार महीने में चालीस ग्राम कम ना हो रहा वज़न और उसे एक घण्टे में सौ ग्राम कम करने का गुर बता रहें हो, आंटीजी आपने खुद तो आदिवासी तेल पेलकर पूरे घर को बदबू से भर दिया और आंटीजी कह रही "बाल थोड़े और काट देना थे" हद है मूर्खता की
अबै, घोलचू के घोल और टूटी स्लीपर के घिसे हुए काँटों - निकलों ना अब, बन्द करो बकर तुम्हारी - ससुरों रेलवे का टिकिट तो नेट पर बनाना सीख लों या अब तुमको भेजें ओलंपिक में

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...