Skip to main content

Khari Khari Karwa Chauth 1 November 2023 's Post

करवा चौथ का उलूक राज और राजे

◆●●◆
फेसबुक पर पति-पत्नी के सुंदर-सुंदर फोटो देखें दमकते और चमकते हुए, पर जब छत पर निकलकर बाहर देखा तो पत्नियाँ तो बहुत सुंदर सज कर खड़ी है और पति महाशय फटी बनियान में और लक्स, अमूल माचो, जॉकी से लेकर एकदम देसी पट्टे वाली हवादार चड्डी पहनकर खड़े हैं कि सारी शीतल मंद बयार और सप्तपर्णी, रातरानी, मोगरे, शिऊली, मधु मालती और गुलाब की गंध से तन - बदन महक उठे, करवा चौथ के उपलक्ष्य में
आंखों में नींद है, पत्नी उन्हें तक रही है चलनी से और पति महाशय पड़ोस की छत पर भाभी पर नजर गड़ाए खड़े है, उधर भाभी के सैया दफ़्तर की भाभी को इंस्टाग्राम पर लाइव देखकर चाँद से दुआ कर रहें कि अंगले जन्म मुझे बॉस ही कीजो, मोहल्ले के लौंडे गली के चक्कर लगा रहे कि कोई छत खाली दिखे भैया विहीन तो सब्स्टीट्यूट बनकर हो आये, साला चलनी में थोबड़ा देखने से उम्र बढ़ती तो दुनिया भर के सैनिकों की बीबियां सारी चलनी ही खरीद लेती और भूखा रहना तो पूरी आधी आबादी का नसीब है
क्या ही किया जाए, साला हर साल का येईच सच है, सब ससुरे मज़ाक उड़ायेंगे, दिनभर ज्ञान पेलेंगे और रात को उल्लू के माफ़िक खड़े हो जायेंगे बीबी के सामने जो ब्यूटी एप से फोटो खिंचवाने का शौक रखती है
अपुन नहीं किसी को बधाई देगा और ना किसी के फोटो को लाइक करेगा , सब माया है साली, असलियत और फेसबुक की दुनिया का सच में बहुत बड़ा अंतर है रे बाबा, ससुरे सारे के सारे प्रगतिशील आज घर है दिनभर से और कथा सुन और बुन रहें है, किरान्ति देवियाँ भी मेकअप करके चरणों की धूल फांक रही है, कल से फिर जेंडर, स्त्री मुक्ति और रायता फैलाने आयेंगी यहां ससुरियाँ
ब्यूटी पार्लर पर जितना रूपया उजाड़ रही हो बापड़े पति का, उसको एक ढंग की चड्ढी तो खरीद कर दे दो श्रीमती जी ताकि चाँद तो शर्मा ना जाये और ये निर्भया और दामिनी बनने के खेल बन्द करो, तुम्हारी वजह से सारे कानून पुरुषों के खिलाफ बन गए है जो फटी चड्ढी में खड़े होकर उल्लू के माफ़िक अपनी पूजा चलनी से करवा रहे है - जिसमे कुछ नही ठहरता
बस अब थोड़े दिन में छठ का ग़दर होगा, बेचारा जुकर बर्ग कितना स्पेस रखेगा भाई आपके क्रिया कलापों के लिए
भगवान से डरो उल्लूक और उल्लूकियों
[ हर्ट होने वाले यहाँ ज्ञान ना दें वरना हक़ीक़ते जो और कड़वी है, का घोल नाक बंद कर पिला दिया जायेगा और सारी प्रगतिशीलता निकाल दी जायेगी ]

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास

शिवानी (प्रसिद्द पत्रकार सुश्री मृणाल पांडेय जी की माताजी)  ने अपने उपन्यास "शमशान चम्पा" में एक जिक्र किया है चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास अवगुण तुझमे एक है भ्रमर ना आवें पास.    बहुत सालों तक वो परेशान होती रही कि आखिर चम्पा के पेड़ पर भंवरा क्यों नहीं आता......( वानस्पतिक रूप से चम्पा के फूलों पर भंवरा नहीं आता और इनमे नैसर्गिक परागण होता है) मै अक्सर अपनी एक मित्र को छेड़ा करता था कमोबेश रोज.......एक दिन उज्जैन के जिला शिक्षा केन्द्र में सुबह की बात होगी मैंने अपनी मित्र को फ़िर यही कहा.चम्पा तुझमे तीन गुण.............. तो एक शिक्षक महाशय से रहा नहीं गया और बोले कि क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों है ? मैंने और मेरी मित्र ने कहा कि नहीं तो वे बोले......... चम्पा वरणी राधिका, भ्रमर कृष्ण का दास  यही कारण अवगुण भया,  भ्रमर ना आवें पास.    यह अदभुत उत्तर था दिमाग एकदम से सन्न रह गया मैंने आकर शिवानी जी को एक पत्र लिखा और कहा कि हमारे मालवे में इसका यह उत्तर है. शिवानी जी का पोस्ट कार्ड आया कि "'संदीप, जिस सवाल का मै सालों से उत्तर खोज रही थी व...