Skip to main content

मित्रता दिवस की शुभकामनाएं - Post of 7 August 2022

|| मित्रता दिवस की शुभकामनाएं ||

🥀
उन्हें भी जो फेसबुक की दोस्ती को ही पंजीकृत दोस्ती मानते है और झट से अलग हो जाते है ब्लॉक करके
🥀
उन्हें भी जो कभी वाल पर झाँकने नही आते पर मिलने पर ऐसा लाड़ जताते है मानो जन्मों के रिश्तेदार हो
🥀
उन्हें भी जो फेक प्रोफ़ाइल से गर्दा मचाते रहते है और मोबाइल नम्बर मांगने पर कट के निकल लेते है अपनी औकात दिखाकर या माँ - बाप के दिये संस्कार दिखाकर
🥀
उन्हें भी जो आज भी ताकत है और जिन्हें कहो कि-"सुन यार", उसके पहले ही कह देते है "हो जाएगा टेंशन मत कर यार, तू अपना ख्याल रख बस"
🥀
उन्हें भी जो हर नाग पंचमी पर दूध पी जाते है और डकार भी नही लेते या गिरगिट बनकर चौबीसों घण्टे आसपास मंडराते रहते है मजाल कि आपको एक सांस भी चैन की लेने दें
🥀
उन्हें भी जो अभी दोस्ती के नाम पर "दो - दो - दो" ही करते रहते है और लौटाने के नाम पर कन्नी काट जाते है और मोबाइल नम्बर ही ब्लॉक कर देते है
🥀
उन्हें भी जो वर्षों के रिश्तों और सहयोग को भूलकर सिर्फ अपने थोथे वामी, कामी, सपाई, बसपाई, कांग्रेसी, भाजपाई, गांधीवादी, लोहियावादी, जेपीवादी, नेहरू वादी या माफ़िवीरवादी, मोइवादी, शाहीवादी या किसी और के नाम पर सब भूल जाते है
🥀
उन्हें भी जो संगीत साहित्य या पत्रकारिता में किसी विशेष को पसन्द करने पर निजी आक्रमण मान लेते है और अपने निजी व्यवहार या दुखों में सहयोग ना करने और ना लिखने पर अफसोस जताते हुए भड़ास निकालते है
🥀
उन्हें भी जो अपनी किताबों पर लम्बा - लम्बा लिखने की उम्मीद करते है और भिजवाते है, पर अपने स्वास्थ्य के चलते नही लिख पाता तो मन मे खुन्नस रखकर हर जगह रायता फैलाते रहते है
🥀
उन महिलाओं को भी जो कविता कहानी के बहाने आकर दूसरियों के किस्से और सह सम्बन्धों पर प्रकाश डालकर उपकृत कर जाती है और तमाम पुरस्कारों में इंदिरा जी की तर्ज पर विदेशी हाथ होने के पुख़्ता सबूत दे जाती है
🥀
उन माड़साब लोग्स को भी जिन्हें कभी कभी पियार से गरियाता हूँ कि हिंदी की ठेकेदारी से मुक्त होकर कुछ काम करो, अपने शोधार्थियों को बख्श दो कि वे बापड़े तुम्हारा कचरा और कूड़ा परोसकर मोदी की कचरे वाली गाड़ी के ड्राइवर हो गए है जो 24×7 चीखते है - गाड़ी वाला आया जरा कचरा निकाल
🥀
उन्हें भी जो सरकारी पदों पर है पर मजबूरी के चलते कोई लाइक कमेंट नही कर पाते और कभी कभी छप्पर फाड़कर फोन कर अपने मन की बात कह देते है
🥀
उन सभी पत्रकार, सम्पादक मित्रों को भी जो "माले मुफ्त - दिल बेरहम" की भावना से मेरा लिखा माल तो उड़ा लेते है, अपनी नौकरी बचा लेते है पर पारिश्रमिक तो दूर, मेरी लेखकीय प्रति भी नही भिजवाते या लिंक तक शेयर नही करते
🥀
उन सभी युवा कवि मित्रों को जो लिंक्डइन से लेकर इंस्टाग्राम और ट्वीटर पर भी फूलपत्ती से लेकर कविताएँ इतनी पेलते है कि एक दिन जुकरबर्ग इनकी वजह से आत्महत्या कर लेगा कि भाई बस करो अब, कही और जाओ बाबा
☘️
और अन्त में प्रार्थना
☘️
हे ईश्वर, अल्ला, जीसस, वाहे गुरू - इन सबको शक्ति देना कि ये इतने ही क्यूट, स्वीट और चार्मिंग बने रहें ताकि इनसे कह सकूँ कि "आय लभ यू "
❤️❣️❤️
मित्रता दिवस की पुनः शुभकामनाएं, स्वस्तिकामनाएँ आप सबको इस बात के साथ कि
"शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ,
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ"
[ अपुन इन सभी बिंदुओं में है दूसरों के लिये ]

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...

सतरें जीवन के - तटस्थ Satare Jivan ke

सतरें जीवन के   जब प्रवाह में बह जाने का समय आता है, लगता है कि अब सब खत्म हो ही रहा है - अचानक एक तिनका कही से तैरते हुए आ जाता है और शिद्दत से थाम लेता है यह कहकर कि धैर्य रखो, शांत हो जाओ - उजाले की किरणें छटा बिखेरेंगी जल्दी ही शाम ओस से भीगी हुई एक कविता है जिसने संसार में अपनी लय से सबको बाँध रखा है जीवन झूठ का पुलिंदा है और हम सब इसे पसंद करते है, हम सब झूठ के साम्राज्य को बनाये रखना चाहते है और इसी उपक्रम में मरने तक मेहनत करते रहते हैं, अंत में मौत का सच इसकी हवा निकाल देता है अयोग्यता ही असली धन और शांति है, जब तक अयोग्य लोग है तब तक योग्यता की असली और वीभत्स सच्चाई सामने आती रहेगी जो स्वाभाविक ना होकर ना - ना प्रकार के कृत्रिम संसाधनों से अर्जित कर सुख सम्पदा हासिल करने के लिए बेहतरीन स्वांग के साथ ओढ़ी गई है हारना और स्वीकारना हिम्मत का काम है और इसकी जड़ें बहुत गहरी होती है, अपूर्णताएँ, अकुशलताएँ और अधकचरी थोथी सूचनाएँ जीवन के उत्तरार्ध में आपको एहसास दिलाती है कि आपके सारे प्रयास, अभ्यास और चेष्टाएँ व्यर्थ है - इसलिये ख़ारिज करो अपने हर कर्म को, समझ को, देख...