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यह घर बहुत हसीन है - Kuchh Rang Pyar Ke Deeepak Naik Blood Donor Post of 12 Aug 2022

 || यह घर बहुत हसीन है ||











“विभाकर विहार“ - ये खूबसूरत घर ही नहीं, एक सन्देश है जीवन का सन्देश, जब आदमी मुसीबत में होता है तो इधर - उधर भटकता है और अपनों से भी गुहार लगता है पर कही से कोई मदद नही मिलती तब प्रकट होते है देवदूत समान कुछ बिरले लोग - जो आपकी मदद करते है, वे कब आते है और कब अपना काम ख़त्म करके चले जाते है - मालूम ही नहीं पड़ता, जी हाँ मै बात कर रहा हूँ रक्तदाताओं की
अस्पतालों और डाक्टरों से किसी का पाला ना ही पड़े तो बेहतर, पर जीवन में यह संभव नहीं, हम सब कभी ना कभी लाइलाज बीमारी के शिकार होते है, एक्सीडेंट में फंस जाते है - तब आवश्यकता होती है खून की जो कही नहीं मिलता बाजार में, विज्ञान कितनी भी तरक्की कर लें पर मानव खून तो मानव से ही लेना पड़ेगा और यह मिलना आसान नहीं.
अनुज दीपक ने ये काम वर्षों पहले शुरू किया था और आज वे इंदौर या मप्र में ही नहीं, देश के एक आईकोन है. हमारा घर जो इंदौर में है 81, सिद्धीपुरम - वह दीपक के रक्तदान और पूरी यात्रा का जीवंत दस्तावेज है. दीपक ने अभी तक 130 से ज्यादा बार रक्तदान किया है, सिर्फ यही नहीं वे जहां साल में घूमने जाते है वहाँ भी लोगों को खोजकर रक्तदान कर आते है
इस सुन्दर से घर की दीवारें मनमोहक तस्वीरों और चित्रों से सजी है - जिनमें रक्तदान के महत्त्व को इंगित किया गया है इंदौर के वरिष्ठ कवि श्री सदाशिव कौतुक जी दीपक के काम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने घर के बाहर एक शिलालेख बनवाकर गाड़ दिया अपने खर्च से यानि कुल मिलाकर घर की हर ईंट रक्तदान की प्रेरक है
हाल ही में दीपक की एक किताब आई है रक्तदान को लेकर जिसका विमोचन पिछले दिनों हुआ था. यह घर जो अब रक्तदान का जीवंत कला केंद्र है और शायद देश का पहला आवासीय घर होगा जो "वैभवी कला वीथिका" के नाम से जाना जाता है अब, रक्तदान केंद्र के नाम से जाना जाता है , दीपक युवाओं के लिए प्रेरक है और वे हमेशा घर - परिवार में भी सबको एक ही आग्रह करते है कि रक्त दान करो, बाकी सब दानों से रक्तदान का महत्त्व सबसे ज्यादा है
आप भी रक्तदान करिए और मानव जीवन को सफल बनाईये, यदि किसी को को कोई शंका या डर है तो वे मृदुभाषी दीपक से बात कर सकते है, इसी के साथ यह उल्लेखनीय है कि दीपक के पास झोले में चप्पल - जूतों का ढेर रहता है, यदि कोई बच्चा सड़क पर नंगे पाँव दिखता है तो वे तुरंत उतर कर उसे एक जोड़ी चप्पल जूते भी पहना देते है - इस तरह उनका चलता फिरता समाज काम वृहद है और इस पर जितना लिखा जाए - उतना कम है, इन दिनों पति - पत्नी और हमारी लाड़ली बिटिया अनावी भी इसी काम में लगे है, एक बेहतर स्वस्थ समाज के निर्माण का इतिहास जब लिखा जाएगा तो निश्चित ही दीपक का नाम सुनहरे हर्फों में लिखा जायेगा

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