Skip to main content

Posts of 7 and 8 March 2019

ओ और औ की मात्रा में बहुत कन्फ्यूजन होता था बचपन से - मास्टरों ने कुछ सिखाया नही
फिर 2014 में श्रद्धेय मोदी जी की सरकार बनी, पहले स्मृति बैन और फिर जावड़ेकर मंत्री बनें और इनके प्रयासों ने "चो और चौ" का अंतर प्रयोग कर सीखाया सबको, मैंने भी प्रयोग किया और सीखा , पूरे देश ने किया तो अब मेरी हिंदी की वर्तनी इन दो मात्राओं के मामले में सुधर गई
अगली बार 2050 तक इन्हें ही वोट दें ताकि सारे स्वर सीख सब लोग सीख जाएं
आप भी बोलकर देखिये चौ और चो - चौपट राजा और चोरों का सरताज , चोट्टा और चौर्यकर्म , चौतरफ और चोरी और सीनाजोरी आदि
अभ्यास करो-
ऐसे जोड़ीदार शब्द अपनी भाषा से खोजकर दस बार लिखो, चलो शुरू हो जाओ
शाबाश सीखते रहिये , आगे बढिये, बढाईये
***
कुछ भी बोलो उसके कानों पर जूं नही रेंगती
सांसद ने विधायक को जूता मारा
समझो जूं में अनुस्वार है और जूते वाले जू में नही
अभ्यास करो
जूं नही पड़ी पाँच सालों में और चार सेकेंड में सात जूते जैसे उदाहरण अपनी भाषा मे खोजो
***
भोत नुकसान हो गया
कश्मीर, पुलवामा, बालाकोट, लखनऊ से लेकर राफेल दस्तावेजों की चोरी
केदारनाथ, बनारस, बद्री, जगन्नाथ, सब कर लिया - सुप्रीम कोर्ट सीबीआई सब सेट कर लिया ,अम्बानी ,अडानी, रामदेव, जग्गी, अग्गी, रविशंकर, प्रेमशंकर, माल्या,नीरव , जीरव सब करके देख लिया
सेना से लेकर मैना सब कर लिया पर कुछ हो नी रियाँ हेगा, सब मणिशंकर बोलते मुझको और सुसु स्वामी भी इडर दिख नी रियाँ -कां करूँ
मोटा भाई , भोत घबराहट हो री हेगी
कुछ समझ नी आ रियाँ , ये सारी जनता तो पागल है , साली फिर से पूछ री कि कितने आदमी थे, राफेल चोरी पे के रई कि चौ ही चो है
टैंम नी बचा है , कुछ करो भिया थेपला खाओ, फाफड़े लाओ, उनदिया बनाओ, ढोकले बांटो पर कुछ ना कुछ होना चईये
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

अदम गोंडवी की ग़ज़लें

अदम गोंडवी की ग़ज़लें............हिन्दुस्तान ने एक शायर ही नहीं खोया बल्कि एक मुकम्मिल इंसान खो दिया है जो लोगो से लोगो की बात कराता था.............और बस इसी तरह से लड़ते भिडते और मौत से भी जीत गया वो........किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई और किसी का मोहताज भी नहीं रहा धन्य है ऐसे अदम गोंडवी और धन्य है उनकी धारदार लेखनी.........नमन......... काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास मे उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 000 मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की? इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया सेक्स की रंगीनियाँ या ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...