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नीलाम्बर की छाँह में 4 Feb 2018


नीलाम्बर की छाँह में 
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नीला रंग बहुत पसंद है मुझे क्योकि जब साँसों को विराम देना हो तो कुछ ना करो बस एकाध चुटकी कही से कुछ लेकर फांक लो, शरीर की ये जो शिराएँ हल्का नीलापन लिए रहती है ना गहरे भाव से नीली हो जाएंगी इतनी कि इनके अंदर धंसी हुई धमनियां जो ताज़ा खून लेकर स्वच्छंद बहती है , को भी अपने नीलेपन में समा लेंगी जैसे आसमान समा लेता है हर रंग को अपने में !
बहुत दिनों तक मिला नही फिर वो, दिखा नही किसी से पूछा तो पता चला कि शहर से दूर एक दुनिया बसाने की जद्दोजहद में लगा है और सबसे मिलना भी कमोबेश बन्द कर दिया था !
अचानक एक दिन भोर के सपने में दूर से हाथ हिलाते हुए भिन्नाट निकल गया कही। मैं स्मृतियों में याद कर रहा था कौन था वो ?
सुबह नलों में पानी आ रहा था - गर्मियों की दस्तक ने ठंडे पानी से स्नेह बढ़ा दिया है , मुझे आसमान के लाल से नीले होने का बेसब्री से इंतज़ार हर सुबह रहता हैं। आज भी था, जाहिर है मैं जल्दी से छत पर भाग जाना चाहता था।
किसी दोस्त का ही फोन आया था और मैं ताज़े उष्ण पानी को बगैर छुए ही घर चला गया उसके। लोग इकठ्ठे थे और दो बाँस के बीच खप्पचियों मे पड़ा वो मुस्कुरा रहा था। पूरा शरीर नीला पड़ा था - एक नई दुनिया मे उसका नीला पड़ाव एक नील क्रांति से होकर आया था। गेंदे से पीला, गुलाब से सुर्ख लाल और शेवन्ति के फ़ूलों से उसे धवल बनाया जा रहा था।
शिराओं और धमनियों का नीलापन आसमान में एकाकार हो रहा था - यह भी एक सुबह थी !!!

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