Skip to main content

जीवन यूँही बीतता है


अचानक कौंध जाती है कई गलियां, सड़कें और ऊंघती अनमनी सी टेढी मेढी पगडंडियां जिनसे गुजरकर आज यहां पहुँच गया जहां से कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा..
पुकारता हूँ उन पथरीले रास्तों को और उन खम्बों पर टिक जाती है नजरें - जिन पर रात में जलने वाले लट्टू नहीं थे और सर्द हवाओं ने जिनके खोखलेपन को सर्द कर दिया था किसी लाश के मानिंद.
देखता हूँ , बिचारता हूँ , और लगता कह दूं कि तुम्हारा होना और ना होना अब बेमानी लगता है, बस इतनी हिम्मत बची नहीं कि उन गुफाओं में एक बार लौटकर सिर्फ छू भर आऊँ कि मैं और तुम ठहरे थे एक पल, साझा की थी साँसे और फिर चल दिए थे अलहदा होकर !
तुम्हारे लिए ....सुन रहे हो ना ... कहाँ हो तुम .......

उसी रात उनीदी आँखो से उन्हीं पगडंडियों पर चला तो था, पर रात का वक़्त इतनी तेज़ी से भाग रहा था, की पगडंडियाँ जैसे पीछे छूटी जा रहीं थी, उस वक़्त के साथ जो वैसे भी ठहरता कहाँ है। 

सुनो मैं वहीं हूँ, वहीं कहीं हूँ। बस वक़्त तेज़ी से भाग रहा है, और मैं पीछे छूटता जा रहा हूँ। पर देख पा रहा हूँ, तुम्हें दूर से आ रही रोशनी की तरह। थका हूँ, पर हारा नहीं। ज़िंदगी जब तक है, मैं हार नहीं सकता। 

एक तुम्हारे होने से ही सिर्फ,
मेरा वजूद खोता गया आहिस्ते आहिस्ते.
एक तुम्हारा होना ही सिर्फ मेरे, 
प्यार के कर्जदार होने की भी निशानी है।
एक तुम्हारा होना ही सिर्फ, 
सारी बेबसियों का सबब बन जाता है ।
पूरा मुकम्मल बना हूँ मैं,
सिर्फ एक तुम्हारे ना होने से ।

- तुम्हारे लिए.... सुन रहे हो ना .... कहाँ तुम ...

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...