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आज मैंने भी एनडीटीवी पर जब सुना कि अन्ना शाही अब हुक्म देने लग गयी है और हमें समझा रहे है कि किसे वोट देना है किसे नहीं तो तो बहुत अचरज हुआ कि अन्ना किस अधिकार के तहत यह कह रहे है कि कांग्रेस को वोट मत दो........लोकतंत्र की बात करने वाले लोग दूसरों पर अपनी व्यक्तिगत राय कब से थोपने लगे और ऊपर से इस तरह के मुद्दों को हवा देकर या एक पार्टी विशेष को वोट ना देकर क्या कह रहे है अन्ना कि भाजपा को वोट दे या अब उनकी तमन्नाएं फ़िर हिलोर लेने लगी है . कमाल यह है कि रामलीला के मैदान की नौटकी के समय तो पुरे फेसबुक पर लोग पुरजोर तरीके से कोस मसोज या चरण वन्दना कर रहे थे पर अब इन सबके रंग दिखने लगे है तो कहाँ गायब हो गए है वो लोग.......और शहर दर शहर टेंट के तम्बू गाडकर खिलाफत करने वाले क्या अन्ना की राजनीती समझ गए है या अब उन्हें समझ आ गया है कि वे इस्तेमाल किये गए.इस पुरे दौर में......???? बिलकुल सही है ये सब आडवानी की यात्रा के पहले और रामलीला के बाद क्यों है सीधा सीधा कह देते कि देश के हिन्दुओ एक हो जाओ और मोदी या आडवानी को वोट दो.............१३ दिन तक देश को हिलगा कर रखा और अब पीछे से ज्ञान की दूकान खोके बैठे है साथ ही जनमत के बहाने लोगो को रथ यात्रा की तैय्यारी करवा रहे है फ़िर उ प्र ही निशाना क्यों..............अपनी दुश्मनी की सजा हम सबको क्यों दे रहे है..............अन्ना.......रालेगाव् जाए बाकी टीम रोजगार ग्यारंटी योजना के तहत काम करके कमाए खाए............बहुत हो गयी राजनीती.........

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