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Posts from 27 to 5 May 2024

लिखना है तो साहित्यकार से दूर रहो सोशल मीडिया के घसियारों से दूर रहो, बूढ़े और चुके चौहानों से दूर रहो, सम्पादकों से दूर रहो, प्रकाशकों को लिस्ट से हकाल दो, पीएचडी स्कालर्स को ब्लॉक कर दो, बेरोजगारी के दंश झेलकर ब्राह्मणों को जबरन कोस रहे दलितों के नाम पर ऐयाशी करने वाले धूर्त और हारमखोर कवियों - कहानीकारों को जूते मारकर निकाल दो लिस्ट से, पत्रकारों को घास मत डालों, अपने कस्बे - मुहल्लों और शहर के रचनाकारों को भगाओ  साहित्य के किसी भी अच्छे या घटिया आयोजन में मत जाओ - जहाँ ये कार्यक्रम कम सेटिंग भिड़ाने और कुत्तों - कुतियाओं को दूध रोटी देने के धत करम ज़्यादा करते है, महिला रचनाकारों को तो बिल्कुल भी भाव मत दो - वरना वे बर्बाद कर देंगी आपको तारीफ कर- करके, हो सकता है पति छोड़कर आपसे ब्याह करके आपको तबाही तक भी ले आये - ये सब देखा-भाला अनुभव और निचोड़ है 40 वर्ष की हिंदी साहित्य यात्रा का  इस सबको छोड़ोगे तभी सार्थक, कालजयी और सुंदर रच पाओगे  #दृष्ट_कवि #कागज़2 अमेजॉन प्राइम पर है, मुद्दा पुराना है पर स्व सतीश कौशिक और अनुपम खैर के साथ नीना गुप्ता की छोटी सी भूमिका ने इस फ़िल्म को...

Posts from 25 April to 7 May 2024 - Khari Khari, Drisht Kavi and Tatasth

अपनी दोस्ती, रिश्तों और नेटवर्क से दूसरों को कभी भी परिचित मत कराइये, लोग आपको सीढ़ी बनाकर ऊपर चढ़ जाते हैं और आपको धक्का दे देते हैं, अपने लोगों से जब भी मिलें अकेले ही मिलें - यदि आप किसी के साथ मिलते है तो आपने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है तीन - चार उदाहरणों से अभी यह समझ बनी है, अब कोई आपको पूछे कि क्या इसे - उसे जानते है या इसका कोई नम्बर या मेल आई डी मालूम है तो एकदम साफ़ मुकर जाईये, नीचता की हद तक लोग व्यवहार करते है - यह सीख लिखकर रख लीजिए यकीन ना हो तो आज़मा कर देख लें [ तटस्थ ] *** || वोट ना देना ही विकल्प लगता है अब || ●●◆●● गिरते हुए वोटिंग प्रतिशत के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ भाजपा जिम्मेदार है देश में दस सालों में ऐसा गंदा माहौल बना दिया है कि भले लोग वोट देना ही नही चाहते क्योंकि ना लोकतंत्र बचा है ना प्रक्रियाएँ - ईवीएम पर शक है, दूसरों को मौका दिया नही है, तानाशाही का बोलबाला है और ऊपर से हर तरह की धमकी और धौंस से विपक्ष और यहां तक कि अपने मतदाता को भी डरा दिया गया है पढ़े - लिखें - जिनकी सँविधान में आस्था है, वे इस चुनाव को महज़ खानापूर्ति मान रहें हैं, उन्हें मालूम है कि ये आ...

Drisht Kavi and Election related Posts of 22 to 24 April 2024

जिसने मंगलसूत्र की इज्जत नही रखी और सब कुछ छीन लिया वो मंगलसूत्र के नाम पर महिलाओं को बरगला रहा है अपनी बूढ़ी माँ की निजता छीन ली और हर बार मीडिया के सामने बात की शर्म कर रे बाबा थोड़ी, सत्ता और प्रचार के भूखे नोटबन्दी करके महिलाओं की बचत और देश के गरीब का रुपया छीन लिया और शर्म नही देश की रेल से लेकर हवाई सेवाएं बेच दी फिर भी पेट नही भरा तुम भ्रष्ट लोगों का कांग्रेस को बदनाम कर रहा और यह तो सीख ले कि कांग्रेस ने 55 साल शासन किया है, 70 कब से हो गए , ढंग से स्कूल ही पढ़ लेता रे बाबू सुधर जा, बुढ़ापा बहुत खराब होता है बाबू, आडवाणी को देख, पपू को देख [ कॉपी पेस्ट चोरी करने वाले सावधान रहें ] *** सुनते रहिए, गुनगुनाते रहिए बस मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी अब विदा करो मेरे यारा मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी मैंने जाना है उस पार तुम सभी साफ सही हूं मटमैला मैं तुम सभी पाक मगर पाप का दरिया मैं मैनू विदा करो मैनू विदा करो जी अब विदा करो मेरे यार झूठ भला क्यों बोलोगे तुम सब सच कहते हो मेरी नहीं है दुनिया जिसमें तुम सब रहते हो अब विदा करो मेरे यार मेरे सर पे सारी तोहमत तुम धर देना मैं तो मैं हू...

Amit Joshi's Poem and HIs World - Post of 20 April 24

  || भाठ की मिट्टी से उसकी पीठ बना एक टीला || कभी-कभी इस वायवीय दुनिया में ऐसा लगता है कि यह वायवीयता कुछ नहीं बल्कि हम मनमिलें मित्र और एक तरह की रूची रखने वाले अब ऐसे सघन जुड़े है जैसे कोई रिश्ते हो या सहोदर हो. युवाओं में हिंदी के प्रति अगाध प्रेम और लिखने - पढ़ने की जद्दोजहद काबिले तारीफ़ है, तमाम तकनीक और रंजकता के साधन और संसाधन उपलब्ध होने के बाद कोई इस विषम समय और दारूण परिस्थिति में लिख रहा है और रच रहा है तो वह निश्चित ही बधाई का पात्र है. खासकरके कोई युवा मित्र यदि एक बेजान हो चुके मशीनीकृत शहर में नौकरी करके दौड़ते-भागते हुए, समय को साधकर अपनी टेबल पर पहुंचता है और फिर काम के तनाव, व्यवसायिक होड़, प्रेम के अनुभवों, अवसादों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच सृजनरत है, तो यह आज के समय की अनूठी बात ही होगी और मेरे लिए यह सब स्तुत्य है और सराहनीय भी. मैंने पहले भी कहा है कि इतर भाषाओं और अंतर आनुषंगिक विषयों से आने वाले लोगों ने जो भी काम हिंदी में किया है वह अनुकरणीय है. हालांकि लिखना किसी के लिए भड़ास हो सकता है और फिर कविता लिखना तो सबसे सरल और सहज काम है जो तकनीक ने इतना आसन ...

Khari Khari, Drisht Kavi, Ashish Bihani s poem, Maheshwar Tiwari and other Posts from 12 to 19 April 24

  Sonali Bose जी ने पूछा था कि कवियों को युवा कब तक कह सकते है एक पोस्ट में अभी मेरा जवाब दिखा कौनसी भाषा है इस पर निर्भर करता है, हिंदी के कवि तो मालवा में रिटायर्ड होने के बाद भी बने रहते है ससुरे 18 के बाद गिनने वाली सुई तोड़ देते है भोपाल का एक चरण रज पीने वाला और चुके हुए कवियों को इष्ट बोलने वाला कवि रिटायर्ड हो गया 3 साल से , 8 - 10 का ससुर और समधी होगा, दो दर्जन बच्चों का दादा - नाना पर अभी भी युवा नही लिखो तो गुस्सा जाता है अपने इंदौर में भी युवा कम है क्या, पेंशन पाकर, 97 - 98 की उम्र में सुबू शाम इन्सुलिन लेने वाले सब युवा है, तीन चार ब्याह कर लेने वाला भी और बाबुओं के आगे पीपीओ के लिए गिड़गिड़ाने वाला भी, दो नाती अमेरिका और पांच पोते डकाच्या में घासलेटी काम कर रहे फिर भी युवा सम्राट, एक 65 के करीब प्राध्यापक और इंचार्ज प्राचार्य फिर भी जुवा दिलों की धड़कन है जमाने भर के धत करम करके, घाट घाट का पानी पीने वाली, अपना घर तहस नहस कर, नौकरी का सारा रुपया हड़फकर दस मर्दों के संग बुढापा जीने वाली कवयित्री भी युवा है - भले सर पर काली विग लगी हो दर्जनों ब्यूरोक्रेट भोपाल के एकांत पार...