मध्यम वर्गीय - दो कौड़ी की औकात है तेरी ◆◆◆ मध्यम वर्ग झुनझुना बजाओ - तुम इसी लायक हो कमीनो, मेहनत करो, टैक्स भरो और घण्टा बजाओ इस धन्यवाद और नमन की माला बनाकर गले में पहन लो और जुलूस निकालो अपना याद आते है अपनी लॉ की कक्षा के वे छात्र जो डेढ़ दो लाख की बाइक पर आते है, एक्टिवा चलाते है, रोज पार्टियां करते है - हजार डेढ़ हजार यूँही उड़ा देते है और स्कॉलरशिप लेते है - अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े होने के नाते, मुफ्त की किताबें, रजिस्टर - पेन लेते है और बेच देते है सबकुछ और हम मध्यम वर्गीय जेब से रुपया लगाकर किताबें खरीदे, फीस भरें और चुपचाप भी रहें - क्योकि मध्यम वर्गीय है इस देश मे सिवाय जूते खाने के कुछ और है ही नही बोलों मत - सब सहो और समर्पण करते रहो, जिन लोगों को सड़कों पर पैदल चलते देख सहानुभूति जन्मी थी वे लोग एक माह भी नही हुआ और ट्रेन और वॉल्वो में बैठकर पुनः मजदूरी पर जाने लगे हैं - सही है कि सरकार कुछ नही कर पा रही तो मजदूरी करना पड़ेगी, गांव में नही मिलेगी पर इस मध्यमवर्ग को तो आप चूतिया समझकर लॉक डाउन के नाम पर मार डाला और जिनकी नौकरियां सुरक्षित रही उनकी तनख्वाह...
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