होने लगी जिस्म में जुंबिश तो देखिए _______ बुझदिल, कायर और निकम्मी सरकार है मोदी सरकार हाईकोर्ट दिल्ली ने तब स्वत संज्ञान नहीं लिया जब पेपर लीक में बीस से ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या कर ली, आज इन जज साहेबान का जमीर जाग रहा और संविधान याद आ रहा है, अरे देश में लोग जब तुम्हारी माँ बहन कर पर्चे उछाल रहे है, जूते फेंक कर मार रहे है - तब जमीर नहीं जाग रहा आप लोगों का, किस मिट्टी के बने हो आप लोग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने का आदेश सीजेआई नहीं दे सकते क्या और मोदी सरकार को इस पेपर लीक की जांच करने को नहीं कह सकते, नैतिकता तो बनती है , यह सही है कि न्यायपालिका विधायिका को आदेशित नहीं कर सकती, पर चापलूसी, गुलामी और सेटिंगबाजी भी तो मना है संविधान में देशभर में मुल्ला, मौलाना या पंडित और मोदी सरकार के पाले हुए बागेश्वर से लेकर राम - रहीम तमाम कुकर्म करते है या बकवास करते है तब अदालतों का जमीर नहीं जागता, संविधान में लिखित - "वैज्ञानिक मानसिकता को प्रचारित और प्रसारित करने का कर्तव्य" याद नहीं आता, ऐसी न्यायपालिका जो सेटिंग और खौफ से चलती हो उस पर सिर्फ अफसोस ही किया जा सकता है, इ...
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