बढ़ ही गए आखिर पेट्रोल - डीजल के भाव, हो गई चुनाव की नौटंकी, राजा बाबू विदेश से ही अप्रूव कर दिया
इस सरकार ने बारह सालों में देश को सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी ही दी है, अस्सी करोड़ मुफ्तखोरों को राशन बांट रहा है और ऊपर से कह रहा है कि सोना मत खरीदो - मतलब कितना नासमझ और भोला भंडारी है यह मणिशंकर कि कहा नहीं जा सकता
जनता को ऐसा ही बैसाखनंदन चाहिए़ - क्योंकि गौमूत्र पीकर और गोबर खाकर दिमाग ऐसे ही घटिया शख्स को वोट दे सकते है, हर मोर्चे पर असफल आदमी को जब आप चुनोगे - जो अपने ही सुख और आत्म प्रशंसा में व्यस्त रहता है और दिन में पचास बार कपड़े बदलकर अपने ही फोटो शूट करवाता रहता है - तब और क्या ही करेगा अनपढ़ , कारपोरेट का गुलाम
अभी तो 2050 तक इसे ही बनाओ - जब तक ये आपको बेच ना दें या सड़क पर लाकर नंगा न कर दें, अपना खून ना बेचना पड़े या आपकी औलादें भूखी ना मरें , दिमाग गिरवी रखकर सनातनी बनिए और भजन करिए जनता जनार्दन
खूब बधाई महंगाई राक्षस की
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हर संत का एक अतीत होता है और हर दुष्ट का एक भविष्य होता है बस इतना अगर हम सोच और समझ लें तो जीवन धन्य हो जाएगा
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इधर कुछ बुद्धिजीवी, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स, सेना के भ्रष्ट और तानाशाह रहे अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर, जजेस, वकील या मीडिया के दल्ले मोदी की अपील को गैस सब्सिडी सरेंडर करने की अपील से जोड़कर, सोना ना खरीदने के लिए गंभीर मामला बताकर, या उसके विदेश दौरों को जायज ठहरा रहे है , वे ये भूल रहे है कि तीन दिन में इस भांड ने कोलकाता, गौहाटी और सोमनाथ में एक छोटे राष्ट्र के बराबर का बजट खर्च कर डाला और जनता को ज्ञान दे रहा समर्पण का
दुख तब होता है - जब हमारे बुद्धिजीवी या नीति निर्माता इस मोदी सरकार के सारे काले कारनामों और धत् कर्मों को जायज ठहराने लगते है, बारह वर्षों में जहां कुछ काम ठीक किया वही ज्यादातर काम गलत और नाजायज है, संविधान तक को नहीं छोड़ा इन लोगों ने
चुनाव जीतने की हवस ने इन फर्जी लोगों को घटिया स्तर पर ला दिया है और पूरे देश में अंधभक्त हर तरह से परास्त होने के बाद भी पिछलग्गू बने हुए है, NEET से लेकर विदेश नीति पर नहीं बोल रहे कोई, खैर , मोदी नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल तो क्या जगजीवनराम, गुलजारीलाल नंदा, वीपी सिंह या मोरारजी तक की बराबरी नहीं कर सकता कभी
शर्मनाक है इन सबके कृत्य, जीवन भर अवैध रूप से कमाने के बाद, मोटी पेंशन और लाभ पाने के बाद इन भरे पेट लोगों को जिनका आम लोगों से कोई लेनादेना नहीं वे आकर जनता को दोषी ठहरा रहें है, मतलब बेसिक भूल गए और पूरी बेशर्मी से इस घटिया आदमी और सबसे निकम्मी भ्रष्ट और गुमराह तथा आत्म प्रचार में लीन सरकार के गुण बताकर भ्रमित कर रहे है
शर्म मगर उनको आती नहीं है
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कितने शर्म की बात है कि करोड़ों बच्चे मेहनत करके "नीट" की परीक्षा देते हैं और वह परीक्षा कैंसिल हो जाती है और उधर बिहार में वंशवाद को निभाते हुए नीतीश कुमार अपने बेटे को जो गांजा - भांग में लगा रहता है और विचित्र किस्म का है - "निशांत कुमार" जैसे चरसी को बिहार जैसे बड़े राज्य का स्वास्थ्य मंत्री बना देते हैं
कितना विकास और चाहिए इस देश को, अब इस देश के युवाओं को सड़क पर आकर इन सभी नेताओं को कमरों से निकालकर दौड़ाना चाहिए और कसम से दौड़ा-दौड़ा कर पूछना चाहिए कि - "बताओ तुम्हारी शिक्षा कितनी है और तुम्हारी औकात क्या है"
किसी के पास जवाब है कोई
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नीट कितनी नीट
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राजस्थान में तो भाजपा ने पिछली बार चुनाव इसी आधार पर जीता था कि सामूहिक नकल और परीक्षा के पर्चे लीक नहीं होंगे और एक कड़ा कानून बनाया था
आश्चर्य की बात है कि भाजपा शासित प्रदेशों से ही पर्चे लीक होते है और आज तक दक्षिण भारत की किसी जगह से ऐसे समाचार सुनने को नहीं मिलें है
बिहार में अभी एक परीक्षा रद्द हुई, मप्र में मप्र लोकसेवा आयोग की धांधलियों से हम सब वाकिफ है ही , उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली लोकसेवायोग तक भ्रष्टाचार और दलालों का बोलबाला है
और इस सरकार के बड़बोले और अनपढ़ प्रधान को सिर्फ कांग्रेस को कोसना है, नेहरू को गाली देना है, रोज शोशेबाजी करना है, मंदिरों के उद्घाटन करना है, कभी अयोध्या, कभी केदार, कभी बद्री, कभी सोमनाथ, चुनाव में भाषण पेलना है, नदी और समुद्र किनारे बैठकर फोटो शूट करवाना है, और शेष बचे समय में विदेश भाग जाना है
अमित शाह जिस रुतबे से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से बगैर हिंसा के चुनाव इतने बड़े पैमाने पर करवा लेते है अपने प्रबंधकीय कौशल और दक्षता से, क्या उनमें यह साहस है कि वे एक भी परीक्षा बगैर घोटालों और लीकेज के करवाकर दिखा दें या सभी राज्यों के लोक सेवा आयोग भंग करके सेना या किसी और बॉडी को यह काम सौंप दें , पर यह वे क्यों करेंगे - क्योंकि इसमें उनका क्या फायदा, उन्हें भेड़ बकरी चाहिए , मुफ्त के युवा चाहिए जो उनके चुनावो को जीतवाने में मदद करें
देश के युवाओं अभी भी सम्हल जाओ, समझ जाओ इस भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आज तक किसी का भला नहीं किया है, सिवाय सड़कों पर तुम्हे एक आवारा भीड़ बनाकर रखा है, मंदिर मस्जिद की लड़ाई में तुम सिर्फ और सिर्फ झंडा उठाकर रैलियां करने वाले मुफ्त के बेगार वाले मजदूर हो , ना इनके यहां पढ़ाई लिखाई का रिवाज है - ना ये किसी को पढ़ने देंगे, सबको शाखा में लठ ही भांजना है तो पढ़ाई का क्या मतलब
सीजेआई साहब और तमाम हाईकोर्ट के जज साहेबान आपके किसी नाती - पोते या बेटे - बेटी ने NEET दी है क्या , या आप एक किशोर की मेहनत और समय का अंदाज लगा सकते है - क्योंकि आपसे ही उम्मीद है इन हरामखोर नेताओं, दलालों को सलाखों के पीछे भेजने की, सीबीआई की जांच एक नौटंकी है और उसकी रिपोर्ट आजाद हिंदुस्तान में किसी को आजतक देखने को नहीं मिली, हमारी महामहिम राष्ट्रपति तो देवी और सज्जन महिला है - जिन्हें शायद यह सब पता भी नहीं होगा और वो क्यों बोलेगी, मालिक ने कहा नहीं अभी
क्यों ना मानव संसाधन मंत्री के खिलाफ एक आपराधिक षडयंत्र की रिपोर्ट की जाए क्योंकि यदि वे कोई परीक्षा देश में नहीं करा सकते तो उन्हें पद पर बने रहने का और सत्ता रहने तक का पद प्रसाद ग्रहण करने का कोई अधिकार नहीं, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया इसके बारे में पहल क्यों नहीं करता
आप रोते - कलपते रहिए, अपना राजा बाबू तो चला गया है ठंडे देशों में मजे लेने
शर्म नहीं आती किसी को
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