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Drisht Kavi and other Posts from 24 to 29 April 2026

प्रसिद्ध गीतकार स्व नईम जी को को मप्र शासन ने एक बार संस्कृति पुरस्कार में निर्णायक बनाया
तो नईम जी ने तत्कालीन प्रमुख सचिव और सुयोग्य कवि स्व सुदीप बैनर्जी को अपनी स्टाईल में कहा कि
"साला जिस पुरस्कार के लिए हमें योग्य नहीं समझा उसका निर्णायक बना दिया"
आजकल यही हो रहा है कि आपको बोलने या बतियाने योग्य समझते नहीं लोग पर कार्यक्रमों में हेड काउंट बढ़ाने के लिए आमंत्रण दे देते है ताकि बोलने का मौका भी ना देना पड़े और कहने को भी हो जाए कि आपको बुलाया तो था आयोजन में
अभी किसी एक कार्यक्रम का न्यौता मिला जिसमें पचासों ज्ञानी और स्वयंभू सेलिब्रिटी आने वाले है, मेरे खुद के फिल्मों और शास्त्रीय संगीत , कला संस्कृति के सौ से ज्यादा गंभीर और अकादमिक आलेख स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित है, पर भागीदारी नही - हिस्सेदारी के लिए बुलाया गया है, और यह भी कि इसे अन्य बड़े समूहों तक प्रसारित करें , तो यह सब लिखने का मन हुआ
भला हुआ जो मेरी गगरी फूटी
कोई कुछ भी कहें पर सच यह है कि शराफत छोड़ दी मैंने, जब साहित्य से खुद को अलग कर लिया तो इन कैमराजीवी या रील प्रेमी और आत्म मुग्ध आयोजकों और आत्म प्रशंसा में लीन मोतियों से क्या डरना या खौफ करना , भाड़ में जाए मेरी बला से ससुरे
***
ऐसी मरनी जो मारे
बहुरि ना मरना होए
कबीरा मरता मरता जग मुआ
मर भी ना जाने कोई
क्या जाने कीव माररांगे
कैसा मरना होए
जे कर साहिब मनहु ना विसरे
तां सेहल मरना होए
तान सेहल मरना
मरना
मरना होए
किथे तुरदा लब्दा फिरदा
साया नाल साहिब दा
जीन तो पहले मुकदा क्यों वे
जुधन तो ज़्यादा टुटदा
हर धुन गाओ निर्गुण निरभउ
हर धुन सुन निर्गुण निरवैर
हर धुन गाओ निर्गुण निरभउ
हर धुन सुन निर्गुण निरवैर
पैर लम्मे निक्की चद्रां
कफ़न ने पूरा ढकना
जो वि खाया वोह था अपना
बाक़ी तां अहमद शाह दा
सुफ़ने तू झूठे चखदा फिरदा
शहद वी खट्टा लगदा हाय
जीन तो पहले मुकदा क्यों वे
जुधन तो ज़्यादा टूटन
हर धुन गाओ निर्गुण निरभउ
हर धुन सुन निर्गुण निरवैर
हर धुन गाओ निर्गुण निरभउ
हर धुन सुन निर्गुण निरवैर
• कबीर
***
भाजपा का अपना कोई अस्तित्व बचा है क्या अब, आधे से ज्यादा कांग्रेसी, और शेष आप, बाप से लेकर तमाम घटिया और मणिशंकर लॉग्स है
जनसंघ या अटल जी वाली भाजपा है कहां, दीनदयाल जी वाली या संघ के अनुशासन से बंधी भाजपा है कहां, अब तो दो गुज्जुओं के धंधे चलाने वाले, टेंडर लेने वाले, डरपोक, कायर, राजघराने के बचे हुए अवशेष जो संपत्ति बचाए रखने के कारण चाटने में सबसे आगे है या दलित और वंचितों का शोषण करने वाले या अल्पसंख्यक लोग शेष है
और जो भाजपा के वरिष्ठ लोग है उनमें ना संघ के संस्कारित लोग है, ना बुद्धि वाले विजनरी, ना जमीनी काम करने वाले श्रमजीवी लोग
सत्यानाश करके सत्ता बचाए रखने के उपक्रम में धन बल और जुगाड़ से आए लोग ही अब देश का भविष्य है और चड्ढा जैसे अवसरवादी या सिंधिया जैसे घटिया लोग ही भाजपा है, असली कार्यकर्ता आज भी उपेक्षित और वंचित है
पतन की पराकाष्ठा है और यही हाल रहा तो 2029 में पसीना आ जायेगा जैसे अभी एक महिला ने दोनों - तीनों तथाकथित थिंक टैंको को बंधुआ मजदूर बनाकर पसीना ला दिया है
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