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Sandip Ki Rasoi, Drisht Kavi and Other Posts from 1 to 3 Jan 2026


समझ तो गए ही होंगे
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ताजी पीली हल्दी की शुद्ध और घर बने हुए घी में सब्जी बनाई गई, औषधि और स्वाद से भरपूर - साथ ही मौसम की दुर्लभ सब्जी
बस एक प्रयोग किया इसको बनाने में और वह सफल रहा, कोई पेटेंट मत करा लेना
क्या किया, कैसे बनी
हल्दी को धोकर, छीलकर, कद्दूकस कर लिया, घी में खूब भुना और फिर ताजे हरे प्याज को बारीक काटकर, मटर, अदरख और हरी मिर्च को दरदरा पीसकर अलग से भुन लिया घी में, ध्यान रहें लहसून और कोथमीर यानी ताजा धनिया बिल्कुल भी नहीं डाला है इस सब्जी में मैंने
बाद में घी में राई, जीरे और मैथीदाने का बघार डालकर हल्दी, मटर, प्याज एवं मिर्च के मिश्रण को भी घी वाली बघार में डाल दिया, नमक मिर्च गरम मसाला डालकर दस मिनिट पकने दिया, फिर डाला खूब सारा मावा यानी खोवा और अमूल का क्रीम फेंटकर डाल दिया, दस मिनिट और पकाया, लो जी हो गई, बन गई सब्जी
अहा, क्या खुशबू और क्या स्वाद, चार दिन तक घर भर यही खायेगा चटनी की तरह, क्योंकि गर्म बहुत होती है पर इस मौसम में यह दिव्य स्वाद ना लिया तो क्या ख़ाक जिया
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अभी रुको जरा
अंबी हल्दी और पीली हल्दी को छीलकर एवं बारीक काटकर नींबू के रस में काले नमक के साथ धूप में तीन-चार दिन रखा और अब तक करीब-करीब चार किलो चट कर चुका हूँ, अदभुत स्वाद है, पिछले पांच छह सालों से यह खाता हूँ नवंबर, दिसंबर और जनवरी में, यकीन मानिए बुखार, सर्दी-खांसी नहीं होता सालभर, पेट भी ठीक रहता है ; दोनों का मिक्स अचार भी बन गया है नींबू के रस और सरसों के तेल की महक में पक भी गया है - जिसमें ताजी तीखी वाली हरी-हरी मिर्चें चार चांद लगा रही है


इसके साथ ही लगभग चार किलो का पूरे नींबू का अचार भी तैयार हो जायेगा जिसमें है - लाल मिर्च, नमक, गुड, काली मिर्च + इलायची + साबूत धनिया + कलौंजी + लौंग + दालचीनी का पाउडर और खूब सारी सौंठ यानी सूखे अदरख का पाउडर
सर्दियों का सुख इसे ही कहते है
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पार्षद, महापौर, विधायक को कब बर्खास्त करेंगे डॉक्टर मोहन यादव जी
10 लोगों की मौत राज्य प्रायोजित नगर निगम के पानी से होती है, नगर निगम मतलब स्थानीय सुशासन की इकाई, क्या 74 वें संविधान संशोधन को इसलिए लागू किया गया था, आप लोग राजनीति कर रहे हो या सुशासन कर रहे हो, शर्म आना चाहिए, पंचायती राज को तो बर्बाद कर ही डाला अब नगरीय प्रशासन को भी बर्बाद करने पर तुले हो
आपके सारे विधायक और मंत्री उद्दंड और बेलगाम हो गए है, इंदौर नगर निगम के इन चार तृतीय श्रेणी के इंजीनियर्स को बर्खास्त करके क्या ही होगा, अपने भ्रष्ट मंत्री और अकर्मण्य विधायक और नेताओं के भरोसे और भाजपा के ठेकेदार और मवाली लोगों के भरोसे आप सिंहस्थ में सौ करोड़ लोगों को बुलाने के स्वप्न संजो रहे है , ये सब तो सॉफ्ट टारगेट है, मलाई तो विधायक और मंत्री खा लेते है
उज्जैन में सिंहस्थ कर सौ करोड़ लोगों को बुलाकर अव्यवस्था फैलाने का इरादा है क्या, आप तो योगी को बुलाकर चार्ज दे दीजिए सिंहस्थ का अभी से, आपसे नहीं हो पाएगा, आपने तो उज्जैन का कबाड़ा कर दिया
शिवराज जी चौहान ने खान नदी के पानी से पिछला सिंहस्थ निपटाया था, आप तो सेनिटेशन के पानी पर उतर आए , क्या इंदौर, क्या देवास, क्या उज्जैन सारे जनप्रतिनिधि सिर्फ कमाने में लगे है, बीस साल से भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के रिकॉर्ड तोड़ रहे है
अब जनता दिखाएगी आपको घंटा, एक मालवा नहीं सम्हाल पा रहे तो प्रदेश का क्या हाल कर रखा है दो साल में, कभी आत्म अवलोकन कीजिए
सबसे पहले बंगाल के लौटे हारे हुए फर्जी शेर को भगाओ साहस हो तो, ताकि लोग इंदौर में जीना सीख सकें बगैर भय के, तंग आ गए है लोग बाप बेटे और उनके शिष्य की गुंडागर्दी से, आपके दूसरे विधायक के बेटे की शादी में करोड़ों रुपए की आतिशबाजी, यह सब उगाही और गलत ढंग से कमाया जनता का रुपया है जो उजाड़ा है, मतलब खजराना हो देवास की टेकडी या महाकाल इस विधायक के लड़के भगवान के पास चले जाते है इतनी हिम्मत है, कैलाश जी का बेटा आकाश बेट से अधिकारियों को मारता है, कैलाश जी घंटा बोलते है, बाकी विधायकों के निकम्मे नालायक बेटे हत्या कर देते है और नकली मरीज बनकर छूट जाते है
शर्म करो यादव जी, काबू में रखो , मोदी शाह और योगी से सीखो कैसे खुद तानाशाह बनकर इन छछूंदरों को बिल में दबाकर रखा जाता है
समय है अभी भी , वरना ये भस्मासुर आपको ही निपटा देंगे, वैसे ही आपके सितारे गर्दिश में है
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ये जो हिंदी के तथाकथित लोग साल भर में यानी 2025 में पढ़ी हुई किताबों की सूची चस्पा कर रहें है वो करें, पर जिस अंदाज में एक-एक किताब, लेखक का नाम लेकर यहां चैंप रहें है - वह जानकारी कम, संबंधित लेखक या संपादक से सेटिंग का उपक्रम ज्यादा लग रहा है
वैसे एक जिज्ञासा है, यह इनसे पूछा किसने है, जबरन माथे आ रहे है, पढ़कर एहसान किया या अब नोबल चाहिए़ इस कृत्य के लिए
और किस डाक्टर ने लिखकर दिया था कि पढ़ें भी और प्रचार भी करें, मतलब इतना समय कैसे मिला, जाहिर है नौकरी ईमानदारी से ना करके कार्यालयीन समय में किताब पढ़ी, समीक्षा लिखी और लिस्ट बनाते रहें कि साल के आखिरी दिन आत्म प्रचार और ज्ञानी बनने के लिए यह सब पेलेंगे
गजब का दिमाग है बै, कहां से लाते हो ऐसी नैतिकता
[ छोड़ेगा नहीं आखिरी दिन भी किसी को ]

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