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Books and Other Posts from 23 to 25 Jan 2022

दुनिया का सबसे ज्यादा नुकसान पढ़े लिखे लोगों ने ही किया है

यह पत्र नाजी शिविर (concentration camp) में मिला - जिसमें शिक्षकों के लिए निम्नलिखित संदेश था -
"प्रिय शिक्षक, मैं एक कंसंट्रेशन कैंप का उत्तरजीवी (ज़िंदा बचा) हूं ! मेरी आंखों ने वह देखा है जो किसी को नहीं देखना चाहिए ! इंजीनियरों द्वारा गैस चैंबर का निर्माण किया गया ! डॉक्टरों ने बच्चों को जहर दिया ! नर्सों द्वारा बच्चों की हत्या की गई ! महिलाओं और बच्चों को कॉलेज के स्नातकों ने मार डाला और जला दिया ! इसलिए मुझे शिक्षा के बारे में संदेह है !”
कुल मिलाकर सारांश यह है कि जरूरी नही कि हर शिक्षित व्यक्ति एक अच्छा इंसान बने, वह
किसी तानाशाह का अंधभक्त भी बन सकता है
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he Royal Treatment हल्की फुल्की अलग तरह की फ़िल्म है नेटफ्लिक्स पर, छोटी भी है, एकदम अलग स्वाद की
देख डालिये बस
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जनवरी के दूसरे लॉट की किताबें, पहले में वसुधा, शुभम अग्रवाल का काव्य संकलन, कब्ज़े जमाँ, वापस जानेवाली रेलगाड़ी (kalbe kabir), आदि पुस्तकें थी, बहरहाल
◆ अगले जन्म मोहे बिटिया न कीजो - कुर्रतुल एन हैदर ( पुनः खरीदी, किसी ने लौटाई नही)
◆ एक वायलिन समंदर के किनारे - कृश्न चंदर
◆ तिलोका वायकान - नवल शुक्ला
◆ गंगाबीती - ज्ञानेंद्रपति
◆ बाजार की राह में - रस्किन बॉन्ड
◆ उड़ान - रस्किन बॉन्ड
◆ बादशाह की अंगूठी - सत्यजीत राय
◆ सबद निरंतर का अंक
◆ बनास जन के 2 अंक
कहा ना अब मार्च तक रसद बहुत है पढ़ने को, फिर एलएलएम की परीक्षा भी है अभी फरवरी में उसका भी असला खरीद लिया है बस निशाना लगाने की देरी है

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Books on the table
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इस बीच तीन किताबें खरीदी -
◆ कर्बला दर कर्बला - भाई Gouri Nath की
◆ तारीख़ में औरतें , ◆ लपूझन्ना - भाई अशोक पांडे की [ बब्बन कारपोरेट आ रही है ]
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इसके पहले दो लॉट और आ गये थे, अब मार्च तक की फुर्सत है, अगले वित्तीय वर्ष में देखेंगे


























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हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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