Skip to main content

राष्ट्रहित सर्वोपरि Posts of 8 Aug 2019

राष्ट्रहित सर्वोपरि
◆◆◆

Ravish ने आज लिखा है कि युवाओं ने फिर उनसे चिरौरी करना आरंभ कर दिया है कि नौकरियों का अकाल है, परीक्षा ले ली परिणाम नही आएँ या नियुक्तियां नही हो रही
मेरा सुझाव है कि बिल्कुल मदद नही करना चाहिए, कोई अर्थ नही है किसी को मदद करने का - ये लोग सौ जूते खाकर सिर्फ एक गिना जाये ही डिजर्व करते है
मैंने लोगों की मदद करना बंद कर दिया है - सीधा कहता हूँ अपने विधायक या सांसद के पास जाओ, अब ना किसी को राह दिखाता हूँ कि समग्र आईडी के लिए क्या करें या बीपीएल में नाम कैसे जुड़वाएँ या मनरेगा के पोर्टल पर कुछ नही दिखाता या आयुष्मान योजना का कार्ड हो या किसी की सामाजिक सुरक्षा पेंशन का आवेदन लिखता हूँ , अपने मित्रों या सम्पर्कों के सन्दर्भ देना भी बंद कर दिया है - यदि ज़्यादा ही कोई पीछे पड़ जाएं या जिद करें तो फीस मांगता हूँ , कोई समाजसेवा का धंधा नही खोल रखा है - ना ही किसी देशी - विदेशी संस्थान से फेलोशिप ख़ाकर भठियारखाना खोल रखा है घर में
जब भी कोई युवा नौकरी के लिये रिज्यूम भेजता है तो उसे स्पैम फोल्डर में डाल देता हूँ और अंत में एक साथ सिलेक्ट करके डिलीट कर देता हूँ , जिन मूर्खों को राष्ट्र, सत्ता, सरकार और पार्टी में फर्क नही मालूम और ऐसे गधों को जो बारहवीं से लेकर पीएचडी तक शिक्षित है - को तो बुरी तरह से झिड़क देता हूँ
फोकट की मदद करना बंद कर दिया है - ना कोई ग्रामीण भोला है, ना दलित और ना आदिवासी, ना महिला - ना बूढ़ा, ये सब लोग बेहद शातिर है, चतुर है और घाघ होने के साथ घिघौने है लिजलिजे और बासते हुए सेप्टिक टैंक की तरह
युवाओं की मदद तो बिल्कुल मत करो - इनकी जवानी बहुत उबल रही है क्योंकि इन्हें कश्मीरी लड़कियों से ब्याह करना है , श्रीनगर के लाल चौक पर कश्मीरी बेटियों के साथ बलात्कार करके "पोर्न हब" पर वीडियो अपलोड करना है, बाप कमाई से प्लाट लेना है, डल झील में छठ मनाना है
भाड़ में जाने दो, इन्हें कहिये कि अभी कांवड़ यात्रा करें एक माह और गाँजा भाँग चरस पीकर हुड़दंग मचाये, सितंबर में गणेशोत्सव और उसके बाद दुर्गाउत्सव में समय निकल ही जायेगा और साल के आखिर में राम मंदिर बनना शुरू हो जाएगा - वहाँ जाओ श्रमदान करने यह धर्म, देश और समाज की बड़ी मदद होगी
रहा सवाल इनके माँ - बाप का और बाकी शादी ब्याह का तो सरकार माँ , बाप को तीर्थाटन करवा ही देगी और मरने के बाद दो लकड़ी तो कोई दे ही जायेगा और शादी ब्याह करके करेंगे क्या - संगठन में जाओ - सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हो वनवासी कल्याण में लगो अभी सौ वर्ष का जश्न मनाना है ना और फिर अपनी सरकार को नया संविधान लिखने में भी आपकी प्रखर मेधा बुध्दि की ज़रूरत है मित्रों
जय हिन्दू राष्ट्र
भामाकीजै
***
याद रखना पिछली सरकार में और इस सरकार के अभी तक के महत्वपूर्ण निर्णयों में हिंदी का लेखक कहाँ बोला है, कहाँ चुप रहा है, कहाँ लाईक का खटका दबाया है और कहाँ बेख़ौफ़ हंसा है
समय आने दीजिये बताऊंगा सबके नाम और सबकी कारस्तानियां
आप निगाह रखिये कि कितना घटिया और छिछोरापन लेकर वह जानबूझकर प्रकट हुआ है ताकि उसकी राजनीति और कर्म छुप जाएं - वह दिल बहलाने वाली बेहद निम्न स्तर की पोस्ट्स लेकर आया है जिस पर तितलियां मंडराती रहें
हिंदी पत्रिकाओं के सम्पादकों पर नजर रखिये और संगठनों और संगठनों के आकाओं पर भी कि कैसे पुरस्कार बटोरने में वरिष्ठ कवि से लेकर संपादक लगे हुए है
हिंदी का प्रबुद्ध प्राध्यापक वर्ग भी कहाँ है नजर रखिये कि इनकी चाल, इनके गधे - घोड़े और मोहरे किसके इशारों पर चाल चल रहे हैं और ये खुद किन खोल में बैठकर अपने गणित बिठा रहें है
बाकी तो सब साफ ही है
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...