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यम के दूत बड़े मरदूद - Post of 20 June 2019

यम के दूत बड़े मरदूद 
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बड़े लेखक, कवि, आलोचक और महान है आप, साढ़े चार माह में एक किताब पैदा कर देते है आप या सुअरिया की तरह एक साल में दस बारह
हम है फेसबुकिया टाईप लेखक और घटिया मानुस जात
ना कोई बुलाता है ना कही जाते है, ना हिंदी की ठस और जड़ अखाड़ेबाजी आती है - ना लल्लो चप्पो करना, ना विवि में पढ़ाते है ना महाविद्यालय में समोसा खाते हुए प्राचार्य को गाली देकर महिलाओं के किस्से सुनते है स्टाफ रूम में , हिंदी की चिन्दी अपना इलाका ईच नई है जो उठाये फिरे किसी भांड या चारण की तरह
ना किसी क्लासिक लेखक को उद्धत करने की औकात है और ना बकवास किस्म की ओढ़ी हुई नज़ाकत का ढकोसला है
जो अंदर है वही बाहर है हम, ना किसी प्रशासनिक अधिकारी को मख्खन लगाते है ना सम्पादक के जूते चाटते है
ना जवाहर भवन जाने की चाह है ना संस्कृति के भवनों और एशगाहों में अड्डेबाजी कर कुंडली मारे बैठे बाबू किस्म के जहरीले फनों से इश्क है
ना बड़े कार्यक्रमों के पहले युवाओं को पपोलना आता है ना बुजुर्गों की मरम्मत करना
इस सबके बाद तुम घटिया लोग हमें फेसबुकिया लेखक कहकर उपहास उड़ाओ तो हमें फिर भी प्यार है तुमसे
अभी देखा और गिना कि एक महान ने एक दिन में 16 पोस्ट लिखी, दूसरे गिद्ध ने 4 लिखी, एक निरापद ने 11 लिखकर अपने ब्लॉग का अश्लील प्रदर्शन किया, एक ने 54 महिलाओं पुरुषों को नाइस से लेकर पता नही क्या क्या कमेंट के रूप में बकलोली की और 163 लाईक किये 24 मिनिट के अंतराल में
ससुरे ज्ञानी बन रहे हैं, अरे दिनभर फेसबुक पर रहते हो - टट्टी, उल्टी, मरोड़ सब लिखोगे कविता पर बहस करोगे पर नामवर तो तुम्हारा बाप भी नही बन पाया तुम क्या बनोगे और पहले दूध के दांतों की जगह पक्के दांत तो आ जायें , apple adam तो फूटें गले से और अपनी किशोरावस्था की लंबाई - चौड़ाई तो पूरी प्राप्त कर लो सदानीरा के गुदा द्वारों में छपे महान बाजीगरों और कितनी तमन्नाएं है - क्या बनोगे - काफ़्का के क्लोन और सात्र के फीनिक्स
यह शोध इसलिए कि तुम्हे तुम्हारी औकात बताना जरूरी है ताकि दूसरों के घरों में जलती आग में रोटी सेंकने से पहले अपनी झोपड़ी में पड़े मिट्टी के तेल में डूबकर मरने के सजीले स्वप्न भी देख लो
सब नौकरी करते हो सरकारी हरामखोरी वाली और नौकरी के समय में यह सब करते लज्जा नही आती, दूसरों को ब्रह्मज्ञान देकर बड़े नैतिक , प्रतिबद्ध बनते हो और खुद तो देख लो आईना एक बार और अधिकांश तो नौकरी पर जाते भी नही - जात पांत का भेद पाले तुम कबर बिच्छुओं की नस्ल वालों कभी सूचना के अधिकार में तुम्हारी उपस्थिति मांग ली और असली जगह की उपस्थिति दिखा दी तो क्या मुंह दिखाओगे भ्रष्टाचारियों
आगे से ज्यादा चूं - चपड़ की तो यहां स्क्रीन शॉट भी लगेंगे - समझे दो कौड़ी की घटिया लोक लुभावन सस्ती पोस्ट्स लिखने वाले साहित्यकार

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