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Khari khari 20 Jan 2018



गलती युवाओं की नही हम पालकों , अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लोगों की है जो इन निठल्ले युवाओं , अपनी नकारा पढ़ी लिखी औलादों को घर बैठकर खिला रहे है अपने हाड़ तोड़कर।
सालों को घर के बाहर निकालें जाने दो जनरल डिब्बे में लटक कर दिल्ली मुम्बई सूरत या कोलकाता जहां मेट्रो या निर्माण कार्यों में मजदूरी करेंगे, दो सौ रुपया रोज कमाएंगे , एड़ियां घिसेंगे , हैंड पम्प का पानी पीकर सड़क पर सोएंगे तो सब अल्ला हो अकबर और जय जय सियाराम भूल जाएंगे फिर ना जय भीम याद आएगा ना कोई पटेल, ना नर्मदा मैया की जयकार होगी , ना जय येशु होगा।
मैंने, आपने , हमने और समाज ने इन्हें ये आवारगी, हरामखोरी और टुकड़े तोड़ने की आदत डाली है और अब हम सब भुगत रहे है। क्या कारण है कि 55 % युवा वाले शिक्षित देश मे मूर्खता की हदें हम पार करते जा रहे है और चार छह नितांत गंवार, अनपढ़ और उज्जड लोग देश का भविष्य बिगाड़ रहे है। कानून, नियम - कायदे और संविधान की भी परवाह नही कर रहे । है कौन ये लोग जो 126 करोड़ लोगों को बेवकूफ बनाकर रोज पेट्रोल डीजल के भाव बढ़ा देते है, अपनी सुविधा और आकाओं के लिए जी एस टी या नोटबन्दी कर देते है ।
युवाओं को फ्री का नेट देकर नामर्द, नपुंसक और बेकार बना देने वाले भ्र्ष्टाचार के सिरमौर बने है और ज्ञान गणित देते है।
डूबने की बारी हम सबकी है और युवाओं की अक्ल पर तो नशा डाल दिया गया है। बेहद शर्मनाक और घृणास्पद माहौल है । फिर कहता हूँ बच्चों पढो लिखो और किसी दूसरे देश मे जाकर बस जाओ - यह देश अब इंसानों के लिए नही है।
*****
एक के बदले दस सिर, 370 खात्मे, कश्मीरी पंडितों के पुनर्बसाहट, गरीबी दूर कर भ्रष्टाचार खत्म करने, काला धन के बदले 100 %एफ डी आई लाने, 15 लाख के बदले और दो करोड़ नौकरियां दिलवाने की ग्यारंटेड पकौड़े की दुकान पर काम करना सीखा रहे है।
जोती कुमार जरूर डेढ़ साल में पकौड़ा तलना सीख गए, सोमवार से 3 दिन दिल्ली, 3 दिन असम और रविवार को प्रधान मंत्री आवास के सामने 50 का सौ ग्राम लेकर बैठेंगे ।
दुनिया मे ऐसी कोई सरकार देखी जो ऐसा जादू करें - पुतिन और ट्रम्प से बेहतर प्रशासन, इस तरह से लिम्का रिकॉर्ड में यह श्रेय भी पूजनीय मोदी जी को जाता है।
भारी ताकत से बोलो भारत माता की जय !
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एक बार दिल्ली में भी किसी का रोड शो करवाकर दिखाएं
हर बार घर में ले जाकर जनता का रुपया बर्बाद करने की जरूरत क्या है।
हर बार किसी ना किसी को चार छह दिन भारत जैसे गरीब देश मे घूमता फिरता सर्कस बनाकर जनता का रुपया बर्बाद किया जाता है।
देश मे और कोई काम नही बचें क्या जो हमारे रुपयों की इस तरह से बर्बादी की जाती है। अपनी इमेज बनाने के लिये हमारी बलि मत दीजिये प्रधान मंत्रीजी । देश को नौकरियों की जरूरत है सैर सपाटों की नही, आप खुद तीन साल से कम कर रहे है जो अब दुनियाभर को यहाँ इकठ्ठा कर और गरीब कर रहे है देश को।

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