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उचित दूरी बनाए रखें - अभिनव निरंजन 19 Jan 2018



उचित दूरी बनाए रखें
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बहुत नज़दीक से चाँद केवल मिट्टी है
और सूरज है खौलता लावा
हीरा केवल कोयला, कोयला केवल जीवावशेष
बहुत नज़दीक से जुगनू है कीट
बहुत नज़दीक से इन्द्रधनुष है ही नहीं

बहुत नज़दीक से आदमी केवल कोशिका तंत्र
आदमी की गंध, माने पसीने की बू
बहुत नज़दीक से रिश्तों की गर्माहट
बनती है निजता का अतिक्रमण
दोस्ती हो जाती है परजीवी
करुणा बनती है दया
क्षमा भी बनती है दंभ

बहुत नज़दीक से ईश्वर लगता है भयावह
राज्य के नज़दीक आये धर्म
एक साधू बन जाता है अभिनेता, दूसरा कैपिटलिस्ट
एक पूरी कौम बन जाती है आरोपी, अभियुक्त या गवाह

जंगल के बहुत करीब आये शहर
जनजाति पर लगती है आंतरिक असुरक्षा की मुहर
नागरिक के बहुत नज़दीक आये राष्ट्र
ध्वज बनती है सूली
एक छात्र बताया जाता है देशद्रोही, दूसरा आत्महंता
राष्ट्रप्रेम के बहुत नज़दीक ही रहती है बग़ावत
राष्ट्रभक्ति के नज़दीक, ग़ुलामी

वर्षों लम्बी सड़कें नापी है इन ट्रकों ने
छानी है धूल, सोखी घृणा और तिरस्कार
यह उनकी बेरुखी नहीं
अपना अनुभव है जो सचेत करता है
'कृपया उचित दूरी बनाए रखें'

[ अभिनव निरंजन, 'पहल-110' में. ]

Comments

वर्षों लम्बी सड़कें नापी है इन ट्रकों ने
छानी है धूल, सोखी घृणा और तिरस्कार
यह उनकी बेरुखी नहीं
अपना अनुभव है जो सचेत करता है
'कृपया उचित दूरी बनाए रखें'
... बहुत सही ...

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